STRINGER24NEWS | विशेष रिपोर्ट |
बरहेटा सरपंच पति के चेहरे से उतर गया “सेवक” का नकाब?
बरहेटा में जिस व्यक्ति ने खुद को सेवक बताकर सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ीं, वही अब सरकारी भूमि पर कब्ज़ा कर निजी आवास के लिए कक्ष खड़ा करने में जुट गया। यह कदम सिर्फ़ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि ग्रामीणों के हक़ पर सीधी चोट है।
| जिसने सेवा का वादा किया था, वह अब सरकारी ज़मीन को अपनी जागीर की तरह नापने में लगा है। |
सरपंच पति की यह हरकत बताती है कि जनसेवा के नाम पर पहनाया गया मुखौटा पहली ही जांच में उतर गया और असली चेहरा सामने आ गया — एक ऐसा चेहरा, जो गांव की जमीन को निजी साम्राज्य समझ बैठा था?
ग्रामीणों का सवाल:
“जनसेवा करने आए थे… या सरकारी ज़मीन पर हवेली खड़ी करने?”
| यह मामला सिर्फ़ एक निर्माण का नहीं — यह उस सोच का पर्दाफ़ाश है, जहाँ सेवा नहीं, सत्ता का दंभ प्राथमिकता बन जाता है। |
