पंचायत गबन पर उबाल: “इतने में कोई नहीं डरता…”
पंचायतों में गबन की लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जब न ठोस जांच दिखती है, न निलंबन और न ही वसूली—तो सवाल उठना लाज़मी है। कार्यवाही के अभाव ने अब ग्रामीणों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है।
गबन की फाइलें दफ्तरों में घूमती रहीं, लेकिन ज़मीन पर गांव लुटता रहा।
गांवों में व्याप्त इसी नाराज़गी के बीच ऑफ कैमरा ग्रामीणों की प्रतिक्रिया अब और तीखी होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ नोटिस, जांच और आश्वासन से पंचायतों में बैठे भ्रष्टाचारियों पर कोई असर नहीं पड़ता।
“इतने में कोई नहीं डरता… पंचायत में गबन कर गांव वालों को लूटने वालों को गधे पर बिठाकर जुलूस निकाला जाना चाहिए, तभी इन्हें शर्म आएगी।”
यह बयान किसी व्यक्ति या ग्राम पंचायत का नाम लिए बिना, उस आक्रोश को दर्शाता है जो वर्षों से दबा हुआ था। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक गबन करने वालों पर सख़्त, सार्वजनिक और उदाहरणात्मक कार्यवाही नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार पंचायतों में यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
सवाल यह नहीं है कि ग्रामीण क्या कह रहे हैं, सवाल यह है कि सिस्टम कब सुनेगा?
