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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

🔥 सब्ज़ियों के दामों में लगी आग! नरसिंहपुर की थाली पर महंगाई का तड़का 🔥

नरसिंहपुर। सर्दी की शुरुआत के साथ सब्ज़ियों के दामों में ऐसा उछाल आया है कि आम आदमी की थाली से हरी सब्ज़ी गायब होती जा रही है। सहजन ₹200 किलो, चने की भाजी ₹200 किलो, मटर ₹150 से ₹180 किलो, और मैथी ₹10 से ₹20 रुपए प्रति बंडल — यह हाल नरसिंहपुर जिले के ज्यादातर बाज़ारों का है।

करेली, गाडरवारा, सालीचौका, गोटेगांव और साईंखेड़ा मंडियों में सब्ज़ियों के दामों ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि खेतों से माल कम आ रहा है, जबकि किसानों का कहना है कि व्यापारी और मंडी में बिचौलिये ही असली खेल कर रहे हैं।

“मंडी से लेकर मोहल्ले की दुकानों तक, दाम दोगुने कैसे हो जाते हैं? यह सवाल अब हर गृहिणी के मन में उठ रहा है।”

नरसिंहपुर की सब्ज़ी मंडी में खुदरा और थोक दामों के बीच का अंतर चौंकाने वाला है। जहां किसान सहजन ₹80–₹100 किलो में दे रहे हैं, वहीं वही सब्ज़ी बाजार में ₹200 किलो तक बिक रही है। यही हाल मटर और चने की भाजी का भी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि “सरकार महंगाई रोकने के दावे तो करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है।” रोज़ाना बाजार दर की जांच करने वाला कोई तंत्र सक्रिय नहीं है, जिससे व्यापारी मनमानी कीमतें वसूल रहे हैं।

“किसान मेहनत करे, जनता महंगाई झेले — और मुनाफा बीचवाले खा जाएं… यही आज की सब्ज़ी मंडियों की सच्चाई है।”

महंगाई की इस आग ने जहां गरीब की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं आम परिवारों के लिए रोज़ की सब्ज़ी अब लक्ज़री बनती जा रही है। सवाल बड़ा है — क्या यह मौसम का असर है या फिर व्यापारियों का खेल?

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