मोहपानी तालाब कांड में बड़ा खुलासा — सचिव ने संभ्रांत महिलाओं तक को “कागज़ी मजदूर” बना दिया!
मोहपानी के जेसीबी–तालाब विवाद में बड़ा विस्फोटक मोड़ सामने आया है। कथित तौर पर यह सामने आया है कि नंदकुमार कौरव और सोमनाथ कौरव के परिवारों के नाम पर दिखाई गई मजदूरी की फर्जी राशि, दरअसल सचिव सत्यनारायण द्वारा किया गया सुनियोजित हेरफेर था।
कथित तौर पर जो जानकारी प्राप्त हुई है उसके मुताबिक सड़क के लिए की गई बजरी परिवहन का ट्रैक्टर भाड़ा दिया जाना था, लेकिन ट्रांसपेरेंसी के डर से सचिव ने यह भुगतान मजदूरी के नाम पर दिखाकर निकाल लिया। हालांकि सड़क निर्माण मामला भी जांच का विषय है,मामले की सच्चाई तभी सामने आ सकेगी?
बताया जाता है कि यदि वह भुगतान किसी अन्य वित्त मद से करता तो प्रक्रिया पारदर्शी होती और हेरफेर कठिन। इसी डर से भुगतान को मजदूरी की आड़ में बदल दिया गया—और दस्तावेजों में पूरा परिवार ‘मजदूर’ बन गया।
सचिव की इस हरकत ने सम्मानित परिवारों की महिलाओं तक को ‘कागज़ी मजदूर’ बना दिया—जिनका इस काम से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।
गांव में माहौल तनावपूर्ण है। जिन परिवारों की महिलाओं के नाम मजदूरी में जोड़ दिए गए, वे अब समाज के सामने शर्म और असहजता में खुद को बेवजह दोषी महसूस कर रही हैं।
यह अब सिर्फ तालाब घोटाले का मामला नहीं — यह इज्जत और प्रशासनिक जवाबदेही की लड़ाई बन चुका है।
- क्या सचिव की कलम इतनी बेईमान हो सकती है कि वह सम्मानित परिवारों की गरिमा तक बेच आए?
- क्या इस मामले में स्वतंत्र जांच की आवश्यकता नहीं?
Stringer24News मामले पर आगे की पड़ताल जारी रखेगा। यदि किसी पाठक के पास संबंधित दस्तावेज़, बिल, या फोटो/वीडियो हों तो कृपया साझा करें।
