नरसिंहपुर। शहर के बीचोंबीच कलेक्टर के बंगले के सामने फुटपाथ चमकते नज़र आते हैं — साफ-सुथरे और खुले। लेकिन जैसे ही कोई आम सड़क या चौराहा पार करें, वही फुटपाथ ठेले, खोमचे और रेहड़ी वालों की गिरफ्त में मिलते हैं। सवाल उठता है कि जहां ज़रूरत नहीं, वहां फुटपाथ साफ़ हैं, और जहां ज़रूरत है, वहां जनता के रास्ते पर अतिक्रमण क्यों?
रेलवे स्टेशन, सुभाष पार्क, बस स्टैंड और नगर पालिका क्षेत्र में फुटपाथ पूरी तरह ठेले वालों के कब्ज़े में हैं। प्रशासन हर दिन इन्हीं रास्तों से गुजरता है — लेकिन आंखें बंद क्यों हैं?
नगर के नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की नज़र सिर्फ़ ‘औपचारिक सफाई’ तक सीमित है। जहां कैमरे पहुंचते हैं, वहां सफाई अभियान दिखता है, लेकिन जहां रोज़ाना हजारों लोग पैदल चलते हैं — वहां अतिक्रमण का साम्राज्य फैला है।
फुटपाथ पर कब्ज़ा न सिर्फ़ पैदल यात्रियों की मुश्किल बढ़ा रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सड़क पार करना हर दिन चुनौती बन चुका है।
प्रशासन की चुप्पी अब सवाल बन चुकी है — आखिर कलेक्टर मौन क्यों?
© STRINGER24 NEWS | सत्य और समाज के बीच की कड़ी.
