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🗳️ 2003 को आधार बनाकर होगा मतदाता सूची का वैरीफिकेशन
— SIR (Special Intensive Revision) शुरू

रिपोर्ट: STRINGER24 NEWS ब्यूरो | तारीख: 6 नवम्बर 2025

भोपाल। प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य 4 नवम्बर से शुरू हो गया है। इस बार निर्वाचन आयोग ने बड़ा बदलाव करते हुए 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया है। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 2003 की सूची में दर्ज है, तो स्वतः ही उसका नाम 2025 की सूची में भी शामिल कर दिया जाएगा।

🔹 2003 सूची बनेगी वैरीफिकेशन का आधार

चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें फिर से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, यदि 2003 की सूची में मतदाता का नाम नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता या रिश्तेदारों का नाम दर्ज है, तो उनके आधार पर भी वोटर वेरिफिकेशन संभव होगा।

यदि फार्म में दी गई जानकारी से एआरओ (Assistant Returning Officer) असंतुष्ट होता है, तो मतदाता को नोटिस भेजा जाएगा। जवाब देने के बाद यदि मतदाता 11 में से कोई एक मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।

🔹 65 हजार बीएलओ घर-घर पहुंचेंगे

प्रदेशभर में लगभग 65 हजार बीएलओ (Booth Level Officer) को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं को एक विशेष SIR फॉर्म वितरित करेंगे। यह फॉर्म आधा भरा और आधा खाली होगा — भरे हुए हिस्से में मतदाता का नाम, फोटो और परिचय पत्र से जुड़ी जानकारी होगी, जबकि खाली हिस्से को मतदाता को स्वयं भरना होगा।

बीएलओ इस फॉर्म को वापस लेकर संबंधित एआरओ कार्यालय में जमा करेंगे। प्रत्येक बीएलओ को अधिकतम 1100 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह तय होगा कि कौन सा नाम मतदाता सूची में रहेगा और कौन सा हटाया जाएगा।

🔹 नवविवाहिताओं और नए मतदाताओं के लिए राहत

नवविवाहिताएं और नए मतदाता इस प्रक्रिया में सीधे लाभान्वित होंगे। जो नागरिक पहली बार नाम जुड़वाना चाहते हैं या विवाह के बाद नए पते पर पंजीकरण कराना चाहते हैं, उन्हें केवल निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा। इनमें जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, या राशन कार्ड शामिल हैं।

🔹 सत्यापन के दौरान होगी सख्त जांच

बीएलओ मतदाताओं से घर पर मुलाकात के दौरान यदि किसी जानकारी पर संदेह होता है, तो वह अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकते हैं। वहीं, गलत जानकारी देने पर नाम सूची से हटाया भी जा सकता है। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य है कि 2025 की मतदाता सूची पूर्ण, शुद्ध और अद्यतन रहे।

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