*भावांतर की यह योजना पिछली योजना से भी ज्यादा खतरनाक?:मा क पा के जिला सचिव ने प्रेस बयान जारी कर कहा*
🔴सोयाबीन खरीदी: घाटा 35 प्रतिशत भावांतर 15 प्रतिशत
♦️अडानी और बिचौलियों की लूट में इजाफा : माकपा
सोयाबीन खरीदी को लेकर भाजपा सरकार द्वारा आठ साल बाद फिर से शुरू की गई भावांतर योजना, जैसा कि आशंका थी, किसानों की लूट को बढ़ाने और अडानी और बिचौलियों की तिजोरियां भरने की योजना बन गयी है। प्रदेश की भाजपा की मोहन यादव सरकार का मकसद भी यही था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव जगदीश पटेल ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि भावांतर की यह योजना पिछली योजना से भी ज्यादा खतरनाक है। उसमे तो आसपास की मंडियों से भाव का मूल्यांकन कर भावांतर की राशि निर्धारित होती थी, लेकिन इसमे तो किसान का सोयाबीन किसी भी भाव पर बिके, उसे भावांतर 728 रुपए क्विंटल ही मिलेगा, और यही हो रहा है।
माकपा नेता ने कहा है कि सोयाबीन की एमएसपी 5328 रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार ने मंडियों में इसका भाव 4600 रुपये प्रति क्विंटल मान कर 728 रुपए भावांतर राशि तय कर दी थी l यह राशि एमएसपी का 15 फीसद है l लेकिन जैसे कि आशंका थी, मंडियों में सोयाबीन का भाव 3500 रुपए से भी नीचे आ गया है l इससे किसान को प्रति क्विंटल 1800 रुपए से अधिक का नुकसान हो रहा है, जो एमएसपी से 35 फीसद कम है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को 728 रुपये ही भावांतर राशि के रूप मे मिलेगा।
जगदीश पटेल ने कहा है कि 35 प्रतिशत से अधिक घाटा होने के बावजूद 15 प्रतिशत की भरपाई का नाटक करना किसानों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कना है l इसकी आशंका मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पहले ही व्यक्त कर चुकी थी कि यह योजना अडानी के सोया प्लांटों के लिए सस्ते में सोयाबीन की व्यवस्था कर अडानी के खजाने भरने की साजिश का हिस्सा है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि किसानों को भावांतर की नहीं, एमएसपी की दरकार है l प्रदेश की मंडियों में मक्का, बाजरा, तिल्ली और कपास उत्पादक किसान भी लुट रहे हैं l मोहन यादव सरकार न तो उनकी लूट को रोकने की कोशिश कर रही है और न ही उन्हें किसी तरह की राहत देने की बात कर रही है। यह सरकार बार बार साबित कर चुकी है कि यह अडानी और बिचौलियों की सरकार है I
माकपा ने मंडियों में किसानों की लूट रोकने की मांग की है l
