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*“चिचली जनपद की ग्राम पंचायत और मनरेगा में गबन का बड़ा खेल, 40% राशि अधिकारी की जेब में?” : नरसिंहपुर*

“चिचली ग्राम पंचायतों में गबन का बखेड़ा, जनता सवाल उठाती रही”

“जनपद चिचली की कई ग्राम पंचायतों में गबन और अनियमितताओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मालनवाड़ा, नारगी, बारछी, सहावन और मोहपानी जैसी पंचायतों में स्थानीय विकास निधियों के गबन के मामले रिपोर्ट किए गए!

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतें बार-बार प्रशासन तक पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीण बताते हैं कि “हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लगता है कि हमारी आवाज़ दबा दी गई है।”

"ग्रामीणों का सवाल यह है कि, क्या सरपंच, सचिव और जीआरएस जनपद चिचली सीईओ को कमीशन देते हैं या यह बस लापरवाही है?”

“ये सिर्फ कुछ पंचायतों की समस्या नहीं, बल्कि अधिकतर ग्राम पंचायतों में ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है। जनता के सवाल अब प्रशासन पर टिकी हैं—क्या सीईओ समय रहते जांच करेंगे या फिर गबन का सिलसिला जारी रहेगा?”

“जनपद चिचली के ग्रामीण विकास और सरकारी निधियों की सुरक्षा पर अब लोगों की निगाहें टिकी हैं। जनता चाहती है कि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो, नहीं तो सवाल उठना स्वाभाविक है—किसके लिए ये पैसा जा रहा है?”

“जनपद चिचली की ग्राम पंचायतों में गबन की सबसे बड़ी चोट मनरेगा मजदूरी पर लगी है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस योजना में मिलने वाली मजदूरी और फंड का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अधिकारियों और पंचायत नेताओं के लालच की भेंट चढ़ गया है!

इसे ऐसे समझिए _ _ _

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा के लिए जारी राशि: ₹500 करोड़ (उदाहरण के लिए)

गबन का हिस्सा: 40% → ₹200 करोड़

सरपंच / सचिव / जीआरएस के मुताबिक अधिकारी/सीईओ को देना पड़ता है: 10% से 15% का “नजराना”

गबन का अनुमानित पैसा जो अधिकारियों तक पहुंचा: ₹20–30 करोड़

ग्रामीण कहते हैं कि,यह कैसा न्याय है,“हमारी मेहनत की मजदूरी में आधा हिस्सा ही हमें मिलता है, बाकी तो अधिकारियों की जेब में चला जाता है।”

ग्रामीणों की मानें तो “सबसे ज्यादा गबन मनरेगा में हो रहा है, और शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।”

“जनपद चिचली के मनरेगा मजदूरों की मेहनत का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। ग्रामीण अब सवाल पूछ रहे हैं—क्या सीईओ और प्रशासन इस पर समय रहते कार्रवाई करेंगे, या फिर गबन जारी रहेगा?”

[डिस्क्लेमर]:

“यहाँ प्रस्तुत आंकड़े स्थानीय शिकायतों, मीडिया रिपोर्ट्स और ग्राम पंचायत फंड रिपोर्ट्स के आधार पर अनुमानित रूप से तैयार किए गए हैं। वास्तविक राशि और प्रतिशत में भिन्नता संभव है। इसका उद्देश्य केवल घटनाओं और संभावित प्रवृत्तियों को दर्शाना है।”

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