ऐसा प्रतीत होता है जैसे, बुनियादी सुविधाओं के नाम पर बरमान के निवासियों को छला गया है।
आज भी बरमान एक अदद बस स्टैंड के लिए तरस रहा है।बड़ी विडंबना है कि वर्तमान में जहां बसें खड़े हो रही है उसे ही बस स्टैंड के नाम से पुकारा जा रहा है।
जिम्मेदारों को सार्वजनिक रूप से इन सवालों के जवाब देने चाहिए कि, बस स्टैंड कितनी भूमि में संचालित हो रहा है तथा जमीन कहां है और कितनी नजूल भूमि पर कब्जा है।
यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश और धूप में खड़े रहना, शौचालय और पानी की अनुपलब्धता के कारण यात्रियों को कठिनाई होती है।
बस स्टैंड पर संचालित होटल,नाश्ते की दुकानों में छिपकर यात्री बारिश से अपना बचाव करते हैं। बस स्टैंड पर न बैठने की व्यवस्था है, न शौचालय और न ही पीने का पानी। इसके बावजूद बसें चलती हैं, यात्राएं होती हैं और हर बात सिर्फ एक सवाल - आखिर क्यों बरमान में एक सर्वसुविधायुक बस स्टैंड नहीं बनाया जा सकता हैं?
यह सिर्फ एक बस स्टैंड की समस्या नहीं, यह व्यवस्था के प्रति हमारी जवाबदेही की भी लड़ाई है। आप जानकर हैरान होंगे कि,मानचित्र पर प्राचीन धार्मिक महत्व की नगरी के रूप में उभरे बरमान में यह स्थिति हैरान करने वाली है। कहीं कोई समय सारिणी नहीं, न कोई सूचना बोर्ड। जिन जगहों से बसें खुलती हैं, वहां पहचानने जैसा कुछ भी नहीं है।




