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*ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा एक गंभीर समस्या:नरसिंहपुर*

नरसिंहपुर जिले में घरेलू हिंसा: विस्तारित सर्वेक्षण रिपोर्ट


नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इस विस्तारित सर्वेक्षण में stringer24news ने नरसिंहपुर जिले के विभिन्न गांवों में महिलाओं के अनुभवों, उनके द्वारा की गई शिकायतों, संबंधित विभागों और महिला हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया है।हमारी इस रिपोर्ट का उद्देश्य इस गंभीर मुद्दे की गंभीरता को उजागर करना और इसके समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करना है।


stringer24news सर्वेक्षण पद्धति

हमने जिले के 10 प्रमुख गांवों से 1000 से अधिक महिलाओं से व्यक्तिगत साक्षात्कार और समूह चर्चाएँ कीं। इसके अलावा, संबंधित विभागों और महिला हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया।


प्रमुख निष्कर्ष

  1. घरेलू हिंसा का व्यापक प्रसार:
    सर्वेक्षण में शामिल 1000 महिलाओं में से 68% ने स्वीकार किया कि वे या उनके परिवार की महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं। इनमें से 45% महिलाएँ शारीरिक हिंसा, 30% मानसिक उत्पीड़न, और 25% आर्थिक शोषण की शिकार रही हैं।

  2. शराब का प्रभाव:
    बीकोर गांव में महिलाओं ने शराब की दुकान को आग लगा दी, क्योंकि उनके अनुसार, शराब के कारण घरों में हिंसा और आर्थिक तंगी बढ़ी थी।

  3. शिकायतों की संख्या:
    2025 में, जिले के महिला थानों में घरेलू हिंसा से संबंधित 120 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से अधिकांश शिकायतें पति या ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों द्वारा की गई हिंसा से संबंधित थीं।

  4. पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया:
    कई मामलों में महिलाओं ने पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कई बार शिकायतों की अनदेखी या विलंब से कार्रवाई की गई। उदाहरण के लिए, कुम्हडी निवासी संध्या मलाह ने अपने पति, सास और जेठानी द्वारा मारपीट और पैसों की मांग की शिकायत की, लेकिन उचित कार्रवाई में देरी हुई।

  5. शिक्षा और जागरूकता की कमी:
    सर्वेक्षण में यह पाया गया कि 70% महिलाओं ने घरेलू हिंसा के बारे में कानूनी जानकारी की कमी की बात की। इसके अलावा, 60% महिलाओं ने यह बताया कि वे सामाजिक दबाव और परिवार की प्रतिष्ठा के कारण हिंसा के मामलों की रिपोर्ट नहीं करतीं।


मीडिया रिपोर्ट्स

  • नरसिंहपुर में महिला की सड़क पर निर्वस्त्र पिटाई:
    एक महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया कि उसने उसे सड़क पर निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीटा।

  • गर्भवती महिला पर हमला:
    सूरजगांव में छह लोगों ने एक गर्भवती महिला और उसके पति पर धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।

  • पत्नी की हत्या:
    गोटेगांव में एक पति ने पारिवारिक विवाद के चलते अपनी पत्नी की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी। 


निष्कर्ष और सिफारिशें

नरसिंहपुर जिले में घरेलू हिंसा की समस्या गंभीर है और इसे तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। निम्नलिखित सिफारिशें की जाती हैं:

  • महिला जागरूकता अभियान:
    महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया जाए।

  • पुलिस प्रशिक्षण:
    पुलिस कर्मियों को घरेलू हिंसा के मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया जाए।

  • सामाजिक समर्थन नेटवर्क:
    महिला हेल्पलाइन, आश्रय गृह और कानूनी सहायता केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।

  • शराब पर नियंत्रण:
    शराब की दुकानों की संख्या पर नियंत्रण रखा जाए और शराब के सेवन के कारण होने वाली हिंसा पर कड़ी कार्रवाई की जाए।


बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में मध्य प्रदेश में रोज़ाना औसतन ~ 20 बलात्कार मामले दर्ज हुए। 2020 में कुल 6,134 मामले थे, जो कि 2024 में बढ़कर 7,294 हो गए। 

2022-24 की अवधि में SC/ST महिलाओं के खिलाफ कुल 7,418 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। साथ ही, इन तीन वर्षों में 558 हत्या के मामले, और 338 गैंग-रेप के मामले SC/ST महिलाओं के खिलाफ हुए। इसके अलावा, SC/ST महिलाओं के प्रति कुल अपराधों का औसत लगभग हर दिन 41 मामले है (सब प्रकार के अपराधों का)। 

30 जून 2025 तक, लगभग 23,129 महिलाएँ और बच्चियाँ मध्य प्रदेश में लापता थीं। इनमें से 21,175 महिलाएँ और 1,954 बच्चियाँ एक साल से अधिक समय से गायब हैं। इसके अतिरिक्त, एक अनुमानित तौर पर ~1,500 आरोपी (rape, sexual assault, abduction आदि मामलों में) अभी भी फरार हैं। 

SC/ST समुदाय की महिलाओं में भयावह रूप से बलात्कार, हत्या, गैंग-रेप के मामलों में वृद्धि हुई है। महानगरीय इलाकों (जैसे भोपाल) की तुलना में ग्रामीण अनुसूचित-जनों के इलाकों में दर वृद्धि अधिक दिख रही है। 

“लापता महिलाएँ/बच्चियाँ” और “अभियोक्ता फरार” जैसी संख्या यह दिखाती है कि रिपोर्टिंग या शिकायत दर्ज करना ही हल नहीं है — मामलों की तफ्तीश, गिरफ्तारी और न्याय प्रक्रिया में देरी और कमी है।

SC/ST महिलाएँ विशेष रूप से ज्यादा प्रभावित हैं, और उनकी सुरक्षा में बड़े अंतर हैं राज्यों/जिलों के बीच।


नोट: stringer24news द्वारा यह सर्वेक्षण रिपोर्ट स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, विभागीय आंकड़ों और महिलाओं के साक्षात्कार के आधार पर तैयार की गई है। सभी आंकड़े और घटनाएँ सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों से पुष्टि की जा सकती हैं।





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