*ग्राम पंचायतों में करप्शन पर अंकुश लगाने में क्यों नाकामयाब रही जिला कलेक्टर शीतला पटले?:नरसिंहपुर*
*सरपंच और सचिव दबी जुबान में ऑफ कैमरा यह स्वीकार करते हैं कि,अगर पंचायत में गबन/घोटाला होता है तो उसका हिस्सा एई से लेकर जनपद अधिकारी तक जाता है! इतना ही नहीं घोटाले की राशि बड़ी होने पर हिस्सा ऊपर तक भी जाता है?*
*आखिर यह ऊपर तक जाने वाली राशि कितनी ऊपर तक जाती है?क्या विधायक और कलेक्टर तक भी भ्रष्टाचार की इस नदी का प्रवाह होता है?दबी जुबान में तो जवाब हां में ही आते हैं!सरपंच और सचिव तो करप्शन के इस स्कैम का छोटा सा मोहरा है!असली खिलाड़ी तो पर्दे के पीछे हैं?*
*आप विगत वर्षों की गबन की शिकायतें और कार्यवाहियों की शैली को देखें तो खुद ही सच को जान सकेंगे!कितनी शिकायतों पर किस तरह की जांच और कार्यवाहियां की गई और दोषियों को क्या सजा दी गई?*
*ग्राम पंचायतों में लगातार गबन की आवाज उठती रही है!कभी शिकायतकर्ता तो कभी स्थानीय ग्रामीणों और कभी पत्रकारों ने गबन के अनेक मामलों का खुलासा किया!*
*एक अनुमान के मुताबिक सबसे अधिक गबन की शिकायतें और खबरें चिचली और गोटेगांव जनपद से सामने आती रही हैं! जनपद सीईओ पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के आरोप भी लगते रहे हैं,लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी!*
*जिले की ग्राम पंचायतों में कितने कागजी तालाब/सड़क बनाए गए और कितने तालाब नियम विरुद्ध तरीके से निर्मित किए गए?हैरानी की बात है कि प्रशासन के पास इन सवालों के लिए कोई सटीक आंकड़ा या संतोषजनक जवाब नहीं है!ग्राम पंचायतों से फर्जी तालाबों/मनरेगा मजदूरी की कितनी शिकायतें सामने आई?इसका भी कोई ठोस जवाब अधिकारियों के पास नहीं है? . .आखिर क्यों?*
*सरपंच और सचिव अगर मिलकर ग्राम पंचायत को लुट रहे हैं तो,इनके इस साहस के पीछे अधिकारियों की शह है? आप देखिए सरपंच पतियों ने जनपद से लेकर जिला पंचायत की बैठक में अपना वर्चस्व बना रखा है!पत्नियां घर पर रोटी बना रही हैं और सरपंच पति कुर्सियां तोड़ रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंख बंद रखने का सेवा शुल्क का आनंद ले रहे हैं!*
जारी :
