*मध्य प्रदेश में दिव्यांग पेंशन की दयनीय स्थिति: ₹600 में जीवन की कठिनाइयाँ*
मध्य प्रदेश में दिव्यांग पेंशन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य सरकार ने 2016 में दिव्यांगों के लिए पेंशन योजना शुरू की थी, लेकिन आज भी यह राशि ₹600 प्रति माह पर स्थिर है, जो जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है। हालांकि, विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री ने ₹1500 पेंशन देने का वादा किया था, लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है ।
आंकड़ों के साथ स्थिति
वर्तमान पेंशन: ₹600 प्रति माह
दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 24 के अनुसार, पेंशन राशि सामान्य पेंशन से 25% अधिक होनी चाहिए, यानी कम से कम ₹1562 प्रति माह ।
अन्य राज्यों की तुलना:
आंध्र प्रदेश: ₹6000
हरियाणा: ₹3000
दिल्ली: ₹2500
केरल: ₹1600
राजस्थान: ₹1500
बिहार: ₹1100
कम पेंशन के कारण समस्याएँ
दवाइयों की कमी: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयाँ महंगी होती हैं, जिन्हें ₹600 में कवर करना संभव नहीं है।
भरण-पोषण की कठिनाई: परिवार के अन्य सदस्य भी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर होते हैं, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल होता है।
स्वास्थ्य देखभाल की कमी: विशेष देखभाल और सहायक उपकरणों की लागत भी पेंशन से अधिक होती है।
आर्थिक और मानसिक तनाव: न्यूनतम पेंशन से जीवनयापन की कठिनाइयाँ मानसिक तनाव और अवसाद का कारण बनती हैं।
मांगें और समाधान
पेंशन राशि में वृद्धि: ₹1500 प्रति माह की पेंशन राशि शीघ्र लागू की जाए।
स्वास्थ्य सहायता: दवाइयों और सहायक उपकरणों के लिए सब्सिडी प्रदान की जाए।
नौकरी और शिक्षा में अवसर: दिव्यांगों के लिए विशेष रोजगार और शिक्षा योजनाओं का विस्तार किया जाए।
दिव्यांगों के लिए पेंशन राशि में वृद्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक है, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार से अपेक्षित है कि वह अपने वादों को पूरा करते हुए दिव्यांगों की भलाई के लिए ठोस कदम उठाए।
