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*क्या मोहपानी अन्याय करेगा?: कौन बैठेगा धरने पर?:जनपद चिचली: नरसिंहपुर*


वैसे तो मोहपानी गांव(भ्रष्टाचार की शव यात्रा) आप सबको याद होगा ही!विगत कुछ समय में ही मोहपानी गांव ने खासी सुर्खियां बटोरी थीं!जहां कभी न्याय,निष्पक्षता,पारदर्शिता और भारिया आदिवासी समुदाय की बात की जाती थी,वहां आज कैसे हालात हैं?

हाल ही की बात करें तो विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्राम मोहपानी के ग्रामीण एक बार फिर धरने की तैयारी कर रहे हैं! हालांकि stringer24news इसकी पुष्टि नहीं करता है!

यदि ऐसा होता है तो,नरसिंहपुर जिले में मोहपानी एक ऐसा इतिहास लिखने जा रहा है,जहां पहली बार अन्याय को समर्थन देने के लिए धरना प्रदर्शन किया जाएगा!यह तो प्रशासन को खुलेआम चेतावनी है!क्या इस तरह की अन्याय पूर्ण और अवैधानिक मांग पर प्रशासन अपने घुटने टेक देगा?

आदिवासियों का शोषण आखिर कब तक किया जाता रहेगा? दरअसल मामला यह है कि,सचिव ने हाल ही में तालाब निर्माण कार्य कराए!

तालाब निर्माण के दौरान नियमों और कानून को पूरी तरह अनदेखा किया गया! फर्जी मस्टर चलाए गए,जबकि तालाब निर्माण जेसीबी मशीन से कराए गए!खुलकर सरकारी पैसों की होली खेली गई और फर्जी मजदूरों को कमीशन भी दिया गया!

सचिव सतेंद्र ने भारिया आदिवासी समुदाय का न सिर्फ शोषण किया बल्कि आदिवासी समुदाय को अधिकारों से भी वंचित किया! एक तरफ प्रधानमंत्री भारिया,बैगा और सहारिया आदिवासी समुदाय के विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं! केंद्र में तमाम तरह की विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि भारिया,बैगा और सहारिया आदिवासी समुदाय का विकास हो सके!

लेकिन स्थानीय स्तर पर देखें तो शासन के कर्मचारी ही सरकार की मंशा और भाजपा की साख को बट्टा लगाने का प्रयास कर रहे हैं? उस पर भी हैरत की बात तो यह है कि, जेसीबी मशीन से तालाबों का निर्माण करवा कर मनरेगा मजदूरी की राशि की होली उड़ाने वाले सचिव को बचाने के लिए धरना प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है?

पूर्व में हुए धरने प्रदर्शन का आकर्षण केंद्र रह चुके कृषक और समाजसेवी धरना प्रदर्शन में शामिल होंगे या नहीं?इसे लेकर फिलहाल कोई जानकारी स्पष्ट नहीं है!

सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर यकीन करें तो पिछले धरना प्रदर्शन में शामिल चेहरों के स्थान पर अब कुछ नए चेहरे दिखाई देंगे!पवन, सुदामा,अभिषेक का ग्रुप रोजगार के संबंध में फिलहाल जिले से बाहर होने की सूचना है!ऐसे में मोतीलाल,खुमन बाई,बडडन उर्फ संतराम जैसे चेहरे धरना प्रदर्शन में दिखाई दे सकते हैं?क्यों कि सचिव ने विशेष कृपा बरसाते हुए मनरेगा मजदूरी की राशि इन्हीं लोगों के खाते में ट्रांसफर की?

मोतीलाल यह जानते हुए भी चुप रहा कि,सचिव सतेंद्र द्वारा जेसीबी मशीन द्वारा तालाब निर्माण कराना न सिर्फ कानून और नियम के विरुद्ध है, बल्कि भारिया आदिवासी के साथ अन्याय है!

जाहिर सी बात है कि धरना प्रदर्शन की तैयारी करने वाले ऐसे लोगों पर लालच इस कदर हावी हो गया है कि,उन्हें न्याय और अन्याय में कोई फर्क दिखाई नहीं देता है!धरना प्रदर्शन के जरिए प्रशासन पर दबाव बनाकर अधिकारियों को झुकाने की ये कोशिशें इतिहास के पन्नों पर बदनुमा दाग साबित होंगी!

जारी : 

ने मुझसे फोन पर कहा कि, हर पंचायत में यही चल रहा है! उससे क्या होता है!
जाहिर सी बात है कि, इसमें इनका कोई स्वार्थ निहित है,अन्यथा न्याय और निष्पक्षता की यह परिभाषा क्यों बदली जा रही, , ,

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