*सरपंच अंजू कौरव के पति की पंचायत में दखलंदाजी?: ग्राम पंचायत मालनवाड़ा (नारगी):जनपद चिचली:नरसिंहपुर*
*घूंघट की आड़ में पंचायत का विकास अधुरा रहता है*
जिस तरह से नरसिंहपुर जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में महिला सशक्तिकरण को पलीता लगाए जाने की घटनाएं आम है, ऐसे ही हालात से ग्राम पंचायत मालनवाड़ा (नारगी)गुजर रही है!
अब तो इस बात को लिखने की जरूरत ही महसूस नहीं होती है कि,सरपंच अंजू कौरव महज रबर स्टाम्प या तंत्र की अदृश्य डोर से बंधी कठपुतली बनकर रह गई है! महिला सरपंच से अधिकार छीने जाने के इन तौर तरीकों से अधिकारियों से लेकर मीडिया जगत के छोटे बड़े धुरंधर तक सभी वाकिफ है! और गांव वालों ने तो सब जानते करते हुए भी वोट दिया था, तो अपना दुख दर्द कहें भी तो किससे?
हां अधिकारियों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के प्रति पनंपने वाले आक्रोश के आवेश में पत्रकारों को भला बुरा कहकर अपना मन हल्का कर लेते हैं!क्यों की वे जानते हैं नेता या अधिकारी के सामने जुबान खोलकर सवाल करने का अंजाम क्या हो सकता है!
सरपंच अंजू ना तो पंचायत भवन कार्यालय ही आती हैं और ना ही कभी किसी जन सुनवाई का आयोजन किया जाता है। सरपंच पति ने सरपंची की कुर्सी पर कब्जा कर रखा है, ग्रामीण भी भैया जी को ही सरपंच मानते और कहते हैं,ताकि भैया जी का इगो हर्ट ना हो जाए!और सरपंच पति रिश्तेदारों और जात भाईयों के खौफ से ही बाहर नही निकल पा रहे हैं?
किसके खाते में सरकारी लाभ पहुंच रहा है? किस पर सरपंच पति की कृपा बरस रही है? इन सवालों के जवाब सरपंच पति और जातिवाद के आसपास घूमते हुए दिखाई देते हैं!
नेतृत्व क्षमता से हीन सरपंच पति को सरपंची चलाने का तो शौक है लेकिन गांव की दशा दिशा बदलने की योग्यता नहीं है! जिसका नतीजा सबके सामने है,आज गांव में पिछड़ेपन की तस्वीर नजर आती है! दरअसल सरपंच पति का मकसद वैसे भी गांव का विकास करना नही है, सम्भवतः सरपंच पति की नजर सरकारी राशि को देखकर ललचाई हुई है,और ध्येय स्व विकास का है!
यदि सरपंच कार्यालय से अनुपस्थित है और उसका परिजन सरपंच की सीट पर बैठता है कर्मचारियाें काे सरपंच की हैसियत बताकर निर्देशित करता है या पंचायत के रिकार्ड काे सरपंच के अवलाेकन व हस्ताक्षर के लिए पंचायत से बाहर लेकर जाता है ताे ग्राम सचिव इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देंगे, लेकिन सचिव भी चंद कमीशन के लालच में आकर शासकीय अधिकारियों को गुमराह करने से बाज नहीं आ रहा है!
शिकायतों की जांच उपरांत मामला सिद्ध होने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा सरपंच अंजू कौरव पर पंचायत अधिनियम की धारा 40 की कार्रवाई करते हुए पद से पृथक कर दिया जाना चाहिए, लेकिन कमीशन के बोझ में दबे हुए अधिकारी भला इतनी सख्त कार्यवाही कैसे कर सकते हैं?














