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🔴 केंद्र सरकार से गन्ना किसान महासंघ (ए आई एस एफ)की मांग ।

🔴 सुधार के नाम पर चीनी नियंत्रण आदेश 2024 वापिस लो ।

🔴 यह मसौदा मिलों एवं गन्ना उत्पादक किसानों के हितों के विपरीत है।

         अखिल भारतीय गन्ना उत्पादक किसान महासंघ (ए आई एस एफ) के केंद्रिय कमेटी सदस्य मध्य प्रदेश से जगदीश पटेल एवं मुरारीलाल धाकड़ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि केंद्रिय कमेटी की बैठक कर्नाटका के कलबुर्गी में राष्ट्रीय अध्यक्ष डी रवींद्रन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसमें विभिन्न प्रदेशों के सदस्यों ने प्रदेश में गन्ना किसानों की समस्याओं को रखा एवं उनके निराकरण के लिए आंदोलन की रूपरेखा बनाई गई। केंद्र सरकार सुधार के नाम पर जो चीनी नियंत्रण आदेश 2024 संशोधन कर रही है वह गन्ना किसानों को बर्बादी का फरमान होगा। उक्त आदेश में किसानों से कोई सुझाव नहीं मांगे गए हैं, चीनी मिल मालिकों से एवं गन्ना विभागों के राज्य स्तरीय अधिकारियों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं जो किसानों के हितों के विपरीत निर्णय होगा। किसानों के हित में निर्णय लेने के बजाय गन्ना किसानों को बर्बाद करने के निर्णय को वापिस लिया जाना चाहिए।

चीनी (नियंत्रण) आदेश - 2024

केंद्र सरकार गन्ना नियंत्रणकेंद्र आदेश-1966 से गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने वाले प्रावधानों को एक-एक करके हटा रही है। धारा 5 ए को पहले ही अधिनियम से हटा दिया गया था, जिसके तहत गन्ना किसानों को चीनी मिलों द्वारा अर्जित लाभ से अतिरिक्त मूल्य प्राप्त करने का अधिकार था। गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में वह प्रावधान जिसके आधार पर राज्य सरकारें गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य परामर्श मूल्य की घोषणा करती थीं, उसे भी केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है।

केंद्र सरकार ने मूल रूप से 8.5% रिकवरी के आधार पर गन्ने की कीमत घोषित की थी, लेकिन अब उसने धीरे-धीरे रिकवरी दर को बढ़ाकर 10.5% के स्तर पर पहुंचा दिया है।

केंद्र सरकार ने अधिनियम से कई ऐसे प्रावधानों को हटा दिया है जो गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद थे।

वर्तमान में केंद्र सरकार गन्ना किसानों को छोड़कर चीनी नियंत्रण आदेश 2024 मसौदा विधेयक पर चीनी मिलों और राज्य सरकारों के संबंधित चीनी विभागों के विचार/टिप्पणियां मांग रही है।

चीनी नियंत्रण आदेश 2024 में एक नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिसमें शर्त रखी गई है कि चीनी मिलों को चीनी और इथेनॉल आदि जैसे उप-उत्पादों को बेचने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति/अनुमोदन लेना चाहिए। यहां तक कि बैंकों के पास गिरवी रखे गए चीनी के स्टॉक को बेचने के लिए भी मसौदा विधेयक में केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेने की शर्त रखी गई है। अगर 2024 का आदेश लागू होता है, तो यह 1966 के अधिनियम के उस प्रावधान को खत्म कर देगा, जिसमें गन्ना किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान करने का प्रावधान है। अधिनियम में यह भी कहा गया है कि चीनी मिलों को यह अधिकार दिया जा सकता है कि वे जब चाहें गन्ना किसानों को भुगतान करें। इससे देश के करीब 50 मिलियन गन्ना किसानों के हित गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

यह अधिनियम संघीय ढांचे के तहत राज्य सरकारों के अधिकारों को छीन सकता है और केंद्र सरकार के पास शक्तियों का और अधिक संकेन्द्रण कर सकता है। केंद्र सरकार को गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की राय आमंत्रित करनी चाहिए और अधिनियम के क्रियान्वयन से दूर रहना चाहिए।

वर्तमान में केंद्र सरकार चीनी मिलों द्वारा निर्मित चीनी की बिक्री के लिए हर महीने कोटा मानदंड तय कर रही है। इसके कारण चीनी मिलों को अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति के अनुसार समय पर चीनी बेचने में कठिनाई हो रही है। केंद्र सरकार को चीनी मिलों द्वारा चीनी की बिक्री के लिए कोटा मानदंड तय करने की प्रथा को बंद कर देना चाहिए।

अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ (एआईएसएफ) ने उपरोक्त प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से गन्ना किसानों और उद्योग के समग्र हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

       महासंघ ने गन्ना किसानों के खिलाफ सरकार द्वारा निर्णय लिया जाता है तो देश भर के गन्ना किसान उग्र आंदोलन करेंगे।

   जगदीश पटेल 


केंद्रिय कमेटी सदस्य 

अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ (ए आई एस एफ)

9827986787

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