*फुटपाथ पर अतिक्रमण!: पुलिस अधीक्षक क्या इस ओर ध्यान देंगे?: जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलने को मजबूर राहगीर!:नरसिंहपुर*
अब प्रशासन भले ही यह दावे करे की पैदल चलने वालों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए फुटपाथ विकसित किए गए हैं,लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि, इन फुटपाथों पर दुकानदारों और रेहड़ी/स्टाल/ठेले वालों का कब्जा है। जगह जगह पर दुकानदारों ने फुटपाथ पर दुकान का सामान सजाकर दुकानों को सड़क तक फैला दिया है।
जिला कलेक्टर शीतला पटले भी शहरी अतिक्रमणकारियों पर चुप्पी साधे हुए हैं! फुटपाथ पर ठेला/रेहड़ी/स्टाल लगाने वालों के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास कोई प्लान नहीं है?कैसे इस शहर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रूप दिया जा सकता है?या फिर नगर पालिका बीस रुपए दिन की वसूली के बाहर कुछ सोच नहीं पा रहा है?
हाल ही के दिनों में सुभाष पार्क चौराहे के पास देखने में आया था की,जिले के प्रतिष्ठित व्यापारिक संस्थान ने फुटपाथ पर अपने प्रोडक्ट के प्रमोशन के लिए ओपन स्टाल लगाया हुआ है,जिसकी वजह से पैदल चलने वालों को खासी परशानियों का सामना करना पड़ा। जिला प्रशासन को एलेन सोली संचालक और सत्कार बजाज के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए चालान करना चाहिए था,क्यों की संस्थान की छोटी सी गलती की वजह से सैकड़ों पैदल चलने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ा?
मुख्य मार्ग को चमकाकर वाहवाही लूटने वाले प्रशासन के अधिकारी शहर की आंतरिक गलियों का रुख नहीं करते? अंदर हालात बद से बदतर है!नरसिंहपुर में स्वच्छता महज कागजी आंकड़ों में दिखाई देती है?पार्षद भी चुप्पी साधे बैठे हुए प्रतीत होते हैं! शहर की गलियों में आवारा श्वान और गौ वंश के आतंक से रहवासी परेशान है और इस पर भी पार्षद आखिर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं?
गांधी चौराहे से होकर सिटी कोतवाली, पोस्ट ऑफिस से सुभाष पार्क जाने वाले मार्ग पर फुटपाथ गायब दिखाई देता है।अधिकांश सरकारी कार्यालय इसी मार्ग पर स्थित है इसके बावजूद भी अधिकारियों को अतिक्रमण दिखाई ना देना आश्चर्य जनक है।फुटपाथ पर जगह-जगह वाहन मैकेनिक, फास्ट फूड व फलों की रेहड़ी लगाने वालों ने कब्जा कर अतिक्रमण कर रखा है। लोगों को मजबूरन सड़क पर वाहनों की आवाजाही के बीच से जान जोखिम में डालकर आना जाना पड़ता है।
जिला कलेक्टर सुश्री शीतला पटले ग्रामीण इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करती हुई दिखाई देती है जबकि उनके खुद के निवास के चंद मीटर दूर ही अतिक्रमण कारियों ने फुटपाथ पर कब्जा कर अपनी दुकानों को सड़क तक बढ़ा लिया है।सड़क पर कहीं भी फुटपाथ नजर नहीं आता।इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों को जानकारी है। लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ऐसे में पैदल चलने वालों को बड़ी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।सड़क पर चलते हैं तो दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। क्या फुटपाथ दुकानदारों की दुकान का आंगन है?
शहर के अनेक हिस्सों में सड़कों पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ तो बनाए गए हैं, लेकिन अवैध कब्जा होने से लोगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।यह समस्या बढ़ती जा रही है लेकिन इसके निराकरण के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो रही है।जिम्मेदारों की नाक के नीचे अतिक्रमणकारी फुटपाथ को लील रहे हैं और जिम्मेदार है कि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं?
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