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*रजिस्टर में बच्चों की उपस्थिति अधिकतम दर्शाने का खेल ; मिड डे मील में कैसे होता है गबन ; नरसिंहपुर।*

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक मिड डे मील योजना में फिर करने के लिए बच्चों की उपस्थिति के आंकड़ों से छेड़छाड़ की जाती है और वास्तविकता से परे उपस्थिति रजिस्टर में बताई जाती है।

कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि मिलीभगत से बच्चों के लिए आने वाले राशन में कटौती करके रोजाना कम मात्रा में आहार दिया जाता है।नौनिहालों को दिया जाने वाला मिड डे मील मानकों के हिसाब से नहीं बनाया जा रहा है। मिड डे में घटिया चावल खराब आलू व अन्‍य सामग्री प्रयोग की जा रही है।

चाहे खाने की गुणवत्ता का सवाल हो, खाना बनाने में लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर खाना खाते समय छात्रों के साथ सामाजिक भेदभाव का, आए दिन ऐसी ख़बरें आती रहती हैं।

शहरों में तो फिर भी यह योजना ठीक से कम कर रही है लेकिन गांवों में यह योजना बिल्कुल भगवान भरोसे है।उसकी वजह ये है कि वहां न तो सही समय पर सामान पहुंच पाता है और न ही समय पर भुगतान हो पाता है!

सप्ताह के हर दिन बच्चों को खाने में क्या दिया जाएगा, इसका बाक़ायदा मेन्यू तैयार है जिसे हर स्कूल में अनिवार्य रूप से बड़े-बड़े अक्षरों में लिखाया जाता है हालांकि ग्रामीण विद्यालयों में मेनू के अनुरूप ही भोजन मिलता है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है!

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी पर यकीन करें तो ग्राम प्रधान, प्रधानाध्यापक और रसोइए की तिकड़ी भी इसके ठीक से लागू न हो पाने के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है!

अनदेखी के चलते नौनिहालों के लिए परोसे जाने वाला एमडीएम उनके लिए खतरा बना हुआ है। मिड डे मील योजना मैं जिस तरीके से पलीता लगाया जा रहा है उस पर न लोगों की नज़र जाती है, न पत्रकारों की?

जब समाज में कुछ गलत हो रहा है तब मीडिया की ज़िम्मेदारी और फ़र्ज़ है कि उसे उजागर करे।एक तरह से देखा जाए तो पत्रकार प्रशासन का काम आसान करते हैं लेकिन यह भी तब संभव है जब प्रशासन की मंशा हो।

अमूमनन तो यह देखने में आता है कि येन केन प्रकरण खबरों को दबा दिया जाता है या दबाने की कोशिश की जाती है इसके लिए साम दाम दंड भेद जैसे तमाम हथकंडे अपनाए जाते हैं ताकि प्रशासन की खबरें बाहर ना जा सके!

ग्रामीण स्‍कूलों में मिड-डे मील बनवाने का जिम्‍मा सीधे तौर से प्रधान और स्कूल के हेड मास्‍टर पर होता है, ऐसे में कहीं कोई खामी मिलती है तो गबन और भ्रष्टाचार के आरोप प्रत्यारोप सीधे प्रबंधन पर लगाते हैं।

जारी 

आमतौर पर मिड डे मील की जब बात आती है तो यह माना जाता है कि इस योजना में जमकर भ्रष्‍टाचार हो रहा है। ऐसे मेंstringer24newsटीम ने के कुछ प्रथामिक स्‍कूलों का दौरा किया, और यह जानने की कोशिश की कि मिड-डे मील में गड़बड़ी की असल वजह क्या है? क्या घोटाला होता है या लापरवाही की वजह से बच्चों को ढंग से मिड-डे मील नहीं बंट पाता।






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