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*मोहपानी के ग्रामीण मनाएंगे काली दिवाली!: प्रशासन कर रहा जांच के नाम पर खानापूर्ति?: ग्राम पंचायत मोहपानी:जनपद चिचली:नरसिंहपुर*

सवाल यह है कि तेंदूखेड़ा निवासी जितेन्द्र कौरव के मामले में प्रशासन क्या कार्यवाही करता है?हालाकि ग्रामीणों ने ओटीपी मामले की जांच को भी अपनी प्रमुख मांग में रखा है!वही फर्जी बिल मामले में सचिव और सरपंच पति पर क्या कार्यवाही होती है?यह देखना दिलचस्प है!क्यों की जब भ्रष्टाचारी का पुतला दहन किया गया था,और अर्धनग्न रैली निकाली थी,तब वीडियो में ग्रामीण नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे थे कि,जितेंद्र की पंचायत में तानाशाही नही चलेगी।जितेंद्र कौरव ने यदि फर्जी तरीके से ओटीपी का इस्तेमाल किया और इसमें सरपंच पति ने उसका साथ दिया है,तब नियमानुसार तेंदूखेड़ा निवासी जितेन्द्र कौरव और सरपंच पति की नियमानुसार विभाग FIR दर्ज करवा सकता है।यह नीतिगत प्रावधान में है,इसके साथ ही कदाचरण के आरोप में सरपंच झुनिया बाई को धारा ४० के तहत पद से प्रथक किया जा सकता है।

मोहपानी के आदिवासी भाई बहनों को न्याय कब मिलेगा?या फिर सिर्फ रिकवरी निकालकर और सचिव का ट्रांसफर कर प्रशासन मामले की इति श्री कर देगा?

इसलिए मोहपानी धरना प्रदर्शन में शामिल समस्त प्रदर्शनकारियों और समर्थकों ने यह निर्णय लिया है कि,यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच नहीं करता है तब ऐसी स्थिति में आंदोलनकारी दीपावली पर घरों में दीये नहीं जलाये जाएंगे, न आतिशबाजी चलाई जाएगी और न ही कोई सजावट की जाएगी। मां लक्ष्मी का पूजन कर पर्व को सादगी से मनाया जाएगा।इसके साथ ही घरों में काली पट्टियां लगाकर विरोध व्यक्त किया जाएगा।

धरना प्रदर्शन समाप्त करने के लिए प्रदर्शनकारियों और समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।आंदोलनकारियों को प्रलोभन (आकर्षक ऑफर) देकर धरना प्रदर्शन को तोड़ने की साजिश भी रची जा रही है।इतना ही नहीं धरना प्रदर्शन पर उंगली उठाने वाले सरपंच और सरपंच पति द्वारा भी बिल के फर्जीवाड़े को लेकर गलत बयानी की गई। हालांकि मामले को लेकर सरपंच और सरपंच पति की खासी किरकिरी हुई।इसके साथ ही धरना प्रदर्शन और इसकी मंशा पर सवाल उठने वालों के लिए यह एक उदाहरण है।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली समाचार सेवा प्रदाता कंपनी के सोशल अकाउंट हैक करने की कोशिश की गई। विज्ञापनों के भुगतान रोक दिए गए है और धरना प्रदर्शन के कारण स्थगित हुई शॉर्ट मूवी *माउंटेन क्वीन* की शूटिंग न हो पाने के कारण कंपनी को तकरीबन 70000 रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।इसके साथ ही माउंटेन क्वीन के विज्ञापन दाताओं से की गई रकम उन्हें लौटानी पड़ी।

हालांकि धरना प्रदर्शन विगत 29 दिनों से लगातार जारी है।ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं। कब तक आदिवासी भाई बहनों को लूटा जाता रहेगा?कब मिलेगा आदिवासी भाई बहनों को न्याय?क्या इन गरीबों का हक इसी तरह छीना जाता रहेगा और ये भोले भाले आदिवासी इसी तरह अभावों में जीवन गुजारते रहेंगे।कितनी ही बार सेवा के नाम पर ही इन्हें बेवकूफ बनाया गया!किसी ने व्यक्तिगत स्वार्थ तो किसी ने राजनीति रोटियां सेकने के लिए इन आदिवासियों का उपयोग किया!दुनिया बदल गई,इंसान चांद तक पहुंच गया और ये आदिवासी अब तक विकास की मुख्य धारा से दूर हैं!यह है 2024 का विश्व गुरु?मारवाड़ी में ऐसे मौकों के लिए एक कहावत प्रचलित है कि,घर का पूत कुंवारा बैठा, बाहर फेरे पड़वाए।

जारी :


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