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*तथाकथित पत्रकार और सरपंच सचिव पर दबाव?*

पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली और खबरों की सौदेबाजी ने तथाकथित फर्जी पत्रकारों को भले ही अल्प समय में बड़ा लाभ दिलवाया हो लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं!लगातार बढ़ती फर्जी पत्रकारों की संख्या से न सिर्फ छोटे कर्मचारी से लेकर अधिकारी,और ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव और जीआरएस परेशान है बल्कि खुद समाज के सम्मानित पत्रकार भी अपमानित महसूस नजर आते है !

अभी हाल ही में एक मित्र ने मुझे कुछ फर्जी पत्रकारो के बारे में सूचनाएं भेजी हैं,और बताया गया कि कुछ लोग पत्रकार न होते हुए भी फर्जी पत्रकार बनकर हालात का फायदा उठा रहे हैं।ऐसा नही है कि यह सिर्फ इन दिनों ही नहीं हो रहा है लेकिन हालात बद से बदतर होते हुए दिखाई दे रहे हैं!

जिन पत्रकारों को पत्रकारिता का भी नहीं पता है,आज वे लोग हाथ में माइक लेकर अपने आप को पत्रकार कहते हुए सरेआम बिना किसी रोक-टोक के घूम रहे हैं। ये अपनी गाड़ियों पर बड़े-बड़े शब्दों में प्रेस लिखाकर इस शब्द का भी दुरुपयोग कर रहे हैं।पत्रकारिता जगत से दूर-दूर तक वास्ता न रखने वालों के पास भी प्रेस कार्ड है। बिना पंजीयन के यूट्यूब और फेसबुकिया पत्रकारिता के चलन से ऐसी परिस्थितियां सामने आ रही हैं। व्यापारियों और अधिकारियों को भ्रमित कर अवैध वसूली करना इनका एक मात्र उद्देश्य रह गया है।

यही वजह है कि,आज समाज में पत्रकार का सम्मान खत्म होता जा रहा है। कुछ लोग धंधा करने के लिए पत्रकार का चोला ओढ़ लेते हैं तो कई पत्रकार धीरे-धीरे यह धंधा अपना लेते हैं! सच तो यह है कि इसे बढ़ावा देने में संस्थानों का भी कम हाथ नहीं है, लोकतंत्र का चैथा स्तंभ बुरी तरह हिल रहा है। स्थिति यह है कि ऐसे में जनता को वही खबरें मिल रही हैं जिससे चैनल,संस्थान या अखबारों को फायदा हो। 

जनता को गुमराह करने वाले ऐसे पत्रकार पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?यह सवाल अहम है,अगर यही सिलसिला चलता रहा तो ऐसे कथित पत्रकार जनता व शासन प्रशासन को गुमराह करते रहेंगे! इसके दुष्परिणाम यह है कि, कथित पत्रकारों की इस अवैध वसूली की वजह से अच्छे छवि के पत्रकारों की छवि भी खराब हो रही है।

आज कुछ पत्रकार संगठन, डीजीटल मीडिया और प्रिंट मीडिया के एक हिस्से ने घर-घर पैदा कर दिए पत्रकार? जिससे सोशल मीडिया का जमकर उठाया जा रहा नाजायज फायदा! जिसकी वजह से आज डिजिटल  मीडिया को भी शर्मसार होना पड़ रहा हैं। आज के इस दौर की कड़वी सच्चाई यह है कि, कुछ अखबार ऐसे हाथों में पहुंच चुके हैं जिनका कलम से कोई लेना-देना नहीं और यही समस्यायें आज पत्रकारों के बीच दरारें पैदा कर रही हैं!

किसी भी परिस्थितियों को वीडियो या फोटो से जोड़कर गलत तरीके से खबरों को चलाना धमकाना और उगाई में बढ़-चढ़कर इस तरह के स्वयंभू पत्रकार यूट्यूब फेसबुक व्हाट्सएप ग्रुप का भी भारी मात्रा में दुरुपयोग कर रहे हैं !जिससे समझने वाली बात है कि, इन फर्जी पत्रकारों ने अब प्रिंट मीडिया में भी सेधं लगा दी है ,अब देखना यह है कि ऐसा लोगो पर कब प्रशासन करवाई करेगा?

ऐसे ब्लैकमेलरों की वजह से पत्रकारिता अपने कलंकित दौर से गुजर रही है ।अगर इस पर लगाम नही लगाई गई तो वह दिन दूर नही की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपनी विश्वसनीयता को खो देगा!
।। विवेचना।।

जारी : 


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