*सरपंच पति झूठ बोल रहा है या फिर सचिव?:ग्राम पंचायत पनारी:जनपद चिचली:नरसिंहपुर*
विगत दिनों पनारी भ्रमण के दौरान सरपंच पति ने बताया कि,सचिव द्वारा जो हेर फेर की जा रही है,उसमें मुझे कोई हिस्सा नही दिया जा रहा है और ना ही सरपंच को साइन करने का कोई कमीशन दे रहे हैं जबकि जीआरएस और सचिव अधिकारियों की मिली भगत के जरिए सरकारी राशि को खुर्द बुर्द कर रहे हैं।
जब हमने सचिव से मामले की पड़ताल के दौरान फोन साक्षात्कार के दौरान सम्पर्क किया तो,सचिव ने अपनी तरफ से बात को सभालते हुए कहा कि,ऐसा कुछ भी नही है,सरपंच की तबियत ठीक नहीं रहती है इसलिए सरपंच पति इस दुख में क्या बोल रहे हैं,उन्हे खुद शायद इसका अंदाजा नही है!पंचायत में सबकुछ ठीकठाक है कोई गड़बड़ नही है!
वहीं जब जनपद सीईओ चिचली से फोन पर संपर्क कर मामले से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए फोन पर संपर्क किया गया किंतु समाचार लिखे जाने तक सीईओ से वार्ता नही हो पाई थी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है की सरपंच पति झूठ नही बोल रहा है,पंचायत में आर्थिक अनियमितता तो की गई है,और स्वाभाविक सी बात है कि,जब सरपंच पति को उसका हिस्सा नही मिला तो सचिव और जीआरएस के कारनामों की पोल खोल कर रख दी!
क्या वाकई ऐसा है की सरपंच पति झूठ बोल रहा है?अगर ऐसा है तो इसकी वजह क्या है?क्या सरपंच पति को अपने नफे नुकसान का अंदाजा नही था?जबकि अब तक तो दो ढाई वर्ष से अधिक का समय होने आ गया है सरपंच पति को पंचायत चलाते हुए!क्या इतने समय में भी सरपंच पति और सचिव की ट्यूनिंग नही बैठ पाई थी?या फिर कमीशन की सौदेबाजी की शर्तों ने सरपंच पति और सचिव के बीच खाई पैदा कर दी है?
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये वही पनारी नरेश हैं जो कभी अपनी पत्नी सरपंच की सील जेब में रखकर घूमते थे और खुद ही अपनी पत्नी के हस्ताक्षर कर देते थे।इसके बाद मामला सुर्खियों में आने पर सरपंच पति ने अपनी इस आदत से तौबा कर ली,जनपद अधिकारी हमेशा को तरह मामले से अनजान ही रहे तो कार्यवाही कैसे हो सकती थी?चोर चोर मौसेरे भाई जो ठहरे!
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