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*भ्रष्टाचार पर जातिवाद/संप्रदायवाद की छत्र छाया?* : *अपराध और भ्रष्टाचार के ग्राफ पर बढ़त बना रहा नरसिंहपुर?*

।। विश्लेषण ।।

विकास की असीम संभावनाओं के साथ नरसिंहपुर जिले की उड़ान को पंख मिल सकते थे,और विकास की एक खूबसूरत तस्वीर उभर कर सामने आ सकती थी बशर्ते अधिकारियों में इच्छाशक्ति काi अभाव और नेताओं में वोट बैंक को साधने मात्र की चाहत यदि ना होती!नेताओं के बैंक बैलेंस बढ़ते रहे और अधिकारियों के पैर अंगद की तरह अपनी कुर्सियों से चिपके रहे! यह है जिले के विकास की तस्वीर का स्याह पहलू!जहां की ग्रामीण जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन काट रही है और शहरी लोगों के लिए शिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याएं मुंह बाए हुए खड़ी हैं!

अपराध,अवैध नशा, सट्टा,गांजा,जुआ और भ्रष्टाचार बेलगाम हो गया है।मीडिया में मोजूद खबरों को देखकर तो यही कहा जा सकता है! इसकी पुष्टि विभिन्न विभागों की फाइलों में बंद सैकडों शिकायतों को अंतहीन फेहरिस्त खुद ही कर रही है!

अब ऐसे में आप क्या करेंगे?और आपके पास चारा ही क्या है?जब भैया जी नर्मदा जी को लूट रहे थे!आप तो तब भी खामोश ही थे!इसलिए आपसे कुछ करने की उम्मीद ही बेकार है!

आपके इस डर ने सफेद पोश भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं!यही वजह है की आज नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायतों का हाल यह है की, गबन के साक्ष्य होने के बाद भी कोई कार्यवाहियां नही की जा रही है!और अब गबन इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है की,किस किस पर और कहां तक कार्यवाहियां हो पाएंगी?

गबन, मनरेगा मजदूरी में हेर फेर,बिल बाउचर मस्टर में छेड़छाड़,पद का दुरुपयोग और महिला सशक्तिकरण को पलीता लगाने जैसे कितने ही मामले हैं,जिन पर जनपद पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों ने ना कभी ध्यान दिया, ना ही कोई जांच ही कभी की जाती है,तब ऐसे कार्यवाही किए जाने की तो बात ही यहां बेमानी है!जाहिर सी बात है की ,आखिर इसकी वजह क्या है?यह सभी जानते हैं!लाखों करोड़ों की इस बंदर बाट में आखिर सभी का हिस्सा है,यही वजह है की शिकायत उठती हैं और दब जाती हैं!

शिकायत कर्ता भी यहां बिक जाता है!अभी हाल ही में एक ग्राम पंचायत में ऐसा ही हुआ था!और ऐसे अनेकों उदाहरण है जब शिकायत उठी पर शिकायत कर्ता ने या तो समझोता कर लिया या फिर मामले पर चुप्पी साध ली!प्रलोभन और दबाव का खेल ही कुछ ऐसा है! आप चाहकर भी कुछ नही कर सकते!और अब तो प्रशासन भी बुलडोजर की ताकत को पहचान गया है,शिकायत कर्ता के घर के आंगन पर ही जब बुलडोजर चलने लगे तो फिर आप किस न्याय की उम्मीद कर रहे है?यह एक बार फिर सोचना चाहिए!

क्या आप जानते हैं की नरसिंहपुर जिले में लगभग कितनी ग्राम पंचायत हैं?तकरीबन 450 ग्राम पंचायत हैं जिले में।आप सोचिए कि यदि प्रत्येक पंचायत से वर्ष में पंच लाख का गोलमाल किया जाए तो यह राशि 22 करोड़ से अधिक है।इतना ही नहीं यही आंकलन आप राशि बढ़ाकर पांच साल के औसत हिसाब से क्रॉस चेक करके देखिए तो आंकड़ा कई करोड़ में पहुंच जाएगा!

आप कल्पना कीजिए कि,जब पंच सालों में तकरीबन सौ करोड़ से अधिक की भ्रष्टाचार की राशि के गबन का दरिया जिस नरसिंहपुर जिले में बहता हो,क्या वहां सरपंच,सचिव,जीआरएस, उपयंत्री और जनपद अथवा जिला पंचायत के अधिकारियों को किसी का खोफ हो सकता है? वह भी तब जब भ्रष्टाचार को बचाने के लिए जातिवाद और संप्रदायव को ढाल बनाया जाने लगे तब?

कुछ घटनाओं का मैं खुद भी चश्मदीद गवाह हूं,जब जातिवाद और संप्रदाय वाद की आड़ में भ्रष्टाचारी को बचाने की कोशिश की गई! करेली जनपद इसका अनोखा उदाहरण है!वहीं जातिवाद और भ्रष्टाचार के गठजोड़ के उदाहरण चिचली और गोटेगांव जनपद में बिखरे पड़े हैं!उनका (भ्रष्टाचारियों) का सिर्फ एक ही मोटो है की "वो जितना खा रहे हैं उन्हे खाने दिया जाए,क्यों की उनकी भूख में किसी ने खलल डाला तो वो बेकाबू हैवान हो जायेंगे?और फिर अपनी भूख को मिटाने के लिए वो सच बोलने वाले का खून भी पी जायेंगे!बस सच किसी भी सूरत में बाहर नही जाना चाहिए "यही इस भ्रष्टाचार के व्यापार का मुख्य नियम है और सबसे बड़ी शर्त है

दरअसल पहले कोई सरकारी करिंदा गबन करता था तो उसे बचाने के लिए तंत्र की तमाम कमजोर कड़ियां एकजुट होकर लग जाती थी, लेकिन अब यही काम जातिवाद और संप्रदाय वाद की आड़ में किया जाने लगा है? ग्राम पंचायत स्तर पर भी इसे महसूस किया जा सकता है।

और यह सारा पैसा जो विकास के लिए आता है,यह किन लोगों की तिजोरियों तक पहुंच रहा है?कितनी हैरानी की बात है की, इतने बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार पर किसी की नजर कैसे नही है?यह सवाल आपके मन में जरुर उठ रहा होगा!और सरकारी कुर्सियों पर अंगद रूपी पैर जमाए अधिकारियों को बरसों से एक ही जगह पर जमे हुए देखकर जवाब मिल भी गया होगा!

दरअसल वे यह जानते हैं की ,आम जनता को सहने की आदत पड़ गई है!आज आम आदमी मंहगाई,बेरोजगारी,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों में ही इतना उलझा हुआ है की,उसे भ्रष्टाचार की सुध ही नहीं बाकी! वैसे भी आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में एक कहावत प्रचलित है की,पानी में रहकर मगर से बैर कौन करे!इससे आप आम जनमानस की मानसिकता को आसानी से समझ सकते हैं!

प्रशासन शासन के हाथों की कठपुतली बन गया है!अफसरशाही का जोर चारो और हावी है!आम जनता त्राहि माम कर रही है!नेताओं की उदासीनता ने स्थिति को और भी बदतर बना रखा है।कहीं शराब माफिया का आतंक है तो कहीं रेत माफिया की गुंडागर्दी, कहीं भू माफिया ने पैर पसारे हुए हैं तो कहीं गांजा और देह व्यापार!

शहरी जनता की पहूंच भले ही बुनियादी सुविधाओं तक हों लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी हालात खराब हैं!कहीं स्कूल जर्जर है तो कहीं आगनवाड़ी, कहीं बिजली आज भी नही है तो कही लोग सड़क के लिए तरस रहे हैं, कहीं पेयजल की समस्या है तो कहीं पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमी तो कहीं सुविधा विहीन विद्यालय भवन!








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