*एक ऐसा अस्पताल जहां डॉक्टर और ड्रेसर नही बल्कि मरीज खुद करते हैं अपना इलाज और मलहम पट्टी: गोटेगांव:नरसिंहपुर*
गोटेगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेवा नगर सरस्वती स्कूल के पास रहने वाली रजनी गौंड उपचार करवाने के लिए पहुंची जहां ड्यूटी पर पदस्थ डॉक्टर नदारत रहे और ड्रेसिंग रूम में कोई भी ड्रेसर मौजूद नहीं था वहीं एक युवक के द्वारा महिला का ब्लड निकलता देख मानवता के नाते ड्रेसर बनकर महिला को राहत पहुंचाने ड्रेसिंग करना शुरू कर दिया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं महिला ने स्वास्थ्य कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में जब वह कल पहुँची तो उसे उपचार नही मिला नया इंजेक्शन लगाए गए इससे साफ जाहिर होता हैं कि गोटेगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नही निभा रहे जिसके कारण आम जनता परेशान हो रही हैं।
*वायरल - अस्पताल में खुद इलाज कर रहे परिजन*
*पूर्व में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोटेगांव वीडियो रहे सुर्खियों में*
गोटेगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर सुर्खियों में है जहां एक और कारनामा सामने आया है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोटेगांव में शर्मसार कर देने वाला वीडियो जो मीडिया पर वायरल हो रहा है जिससे जिम्मेदारो की कार्यप्रणाली उजागर हो रही है।
नरसिंहपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोटेगांव सरकारी अस्पताल में भारी अनियमितताएं प्रदर्शित हो रही हैं हाल ही में कल दिनांक 25 सितंबर की घटना है जो एक एक्सीडेंटल मरीज शासकीय अस्पताल गोटेगांव उपचार हेतु आया था जहां पर ड्रेसिंग रूम में आम आदमी ड्रेसिंग करते नजर आ रहा है जहां दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी नदारद हैं कहने को तो शासकीय अस्पताल गोटेगांव में करीब 50 अधिकारी कर्मचारी कार्यरत हैं जहां दूसरी ओर अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में अधिकारी एवं कर्मचारी इस प्रकार नदारद पाए जाते हैं ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदारो की क्या जिम्मेदारी है, वही दूसरा वीडियो लगभग दो माह पूर्व का है जो मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह है कि एक ग्राम से आई महिला को स्टाफ नर्स द्वारा फर्श पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है जिस महिला की अंत में मौत भी हो गई।
जब मामलों को लेकर अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी बी एम ओ से बात करनी चाही तो उन्होंने पहले तो फोन पर बात की लेकिन जब वीडियो दिखाइए तो उन्होंने फोन काट दिया और फोन पर किसी भी तरह का उत्तर देना उचित नहीं समझा।
ऐसे भयावह कर देने वाले वीडियो जब किसी अस्पताल से निकल कर सामने आते हैं तो यह अस्पताल प्रबंधन के अलावा जिले में बैठे स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठतम अधिकारियों की नजरंदाजी का अंजाम लगता है।
*इनका कहना है*
हम इलाज के लिए गोटेगांव अस्पताल गए थे झगड़े के कारण चोट आई थी, लेकिन हॉस्पिटल में कोई इलाज करने वाला नहीं था यहां तक की पट्टी भी हमारे साथ के लोगो ने बांधी थी।
*- रजनी गौड़, मरीज*
