मोहपानी में अराजकता और अव्यवस्था पैर पसारे हुए है!
हालत बेहद बदतर होते जा रहे हैं,ग्रामीणों में भय मिश्रित आक्रोश स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है!आखिर ग्राम पंचायत मोहपानी में क्या चल रहा है? इसे समझने के लिए आपको गांव के जमीनी हालात से रु ब रू होना पड़ेगा!
दरअसल मोहपानी पंचायत की सरपंच झुनियां बाई है,और सरपंच पति (राजू) अपनी जेब में सरपंच की सील लेकर घूमता है, जब भी किसी ग्रामीण को सरपंच के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है तो सरपंच पति खुद ही हस्ताक्षर कर देता है! वहीं झुनिया और राजू का निवास ग्राम पंचायत के ही ग्राम बड़ा गांव में है,जहां सरपंच पति दिन रात शराब के नशे में धुत घूमता रहता है, बड़ा गांव बेहद ही दुर्गम पहाड़ी इलाका है,जहां मोहपानी के बाशिंदों को पहुंचने में बड़ी कठिनाई होती है,और झुनिया बाई तो कभी पंचायत भवन कार्यालय गई ही नहीं!ऐसे में सरपंच पति गोटी टोरिया में रविवारीय बाजार के दिन आकार ग्रामीणों के आवश्यक शासकीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता है!
ग्रामीणों का कहना है कि,तेंदूखेड़ा का रहने वाला जितेंद्र कौरव सरपंच झुनिया बाई के पति राजू को शराब पिलाकर अपना मकसद साध रहा है!जितेंद्र ही पंचायत चला रहा है!इसलिए ही सरपंच पति जितेंद्र के कहने पर सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी राशि को खुर्द बुर्द कर रहा है!शराब पीने के बाद अक्सर सरपंच पति दो दो, तीन तीन दिन तक होश में नहीं रहता है,जिसका फायदा जितेंद्र उठाता है और इस तरह सरपंच पति, सचिव और जनपद सीईओ धनीराम उइके की मिलीभगत से ना सिर्फ जितेंद्र पंचायत चला रहा है बल्कि भारिया आदिवासियों की सेवा के नाम पर सरकारी राशि को डकार कर मेवा हजम कर रहा है!
स्वाभाविक रूप से इन सभी शिकायतों में सच्चाई का पुट दिखाई देता है और यदि ऐसा है तो स्थानीय प्रशासन के लिए यह बेहद ही गंभीर मामला है!सरपंच पति और सरपंच के हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच से मामले की सच्चाई सामने आ सकती है!कितनी हैरानी की बात है की, कोई व्यक्ति शराब के लालच में आकर किसी तीसरे के कहने पर अपनी पत्नी की सुरक्षा,मर्यादा और प्रतिष्ठा को दांव पर लगा देता है!वह भी सिर्फ चंद सिक्कों के लालच के एवज में?यदि कल झुनिया बाई पर कानूनी शिकंजा कसता है और वे सलाखों के पीछे होंगी तब ऐसी स्थिति में झुनिया बाई की इस हालत का जिम्मेदार कौन होगा? जितेंद्र या फिर सरपंच पति?
जनपद सीईओ धनीराम उईके के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो यह सामने आ जाएगा की,कितनी बार झुनिया बाई सरपंच के तौर पर जनपद में उपस्थित हुई और कितनी बार सरपंच पति और जितेंद्र जनपद की बैठक और मीटिंग इत्यादि में हाजिर हुए,वहीं काल डिटेल से भी जनपद सीईओ धनीराम और जितेंद्र के आंतरिक संबंधों और समझौतों का खुलासा हो जायेगा।इसलिए ग्रामीण उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच और कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
दरअसल ग्रामीणों का कहना यह है की जितेंद्र कौरव होता कौन है तेंदूखेड़ा से आकर यहां पंचायत चलाने वाला! खुद के गांव का विकास क्यों नही कर रहा है जितेंद्र?क्यों की यहां पर भारिया के नाम पर गांव को लूट जो रहा है इसलिए खुद के गांव में समाजसेवी कैसे बन सकता है!ठेकेदारी तो बस बड़ा गांव की है, ,क्यों की सागौन भी तो वहीं कट रहा है!
ग्रामीण आगामी 30 सितंबर को सरपंच पति का पुतला दहन कर धरना प्रदर्शन का आरंभ करेंगे और सरपंच पति प्रथा का विरोध करेंगे! संभवतः यह जिले में सरपंच पति प्रथा के विरोध और पति के पुतला दहन का पहला मामला होगा। ग्रामीणों का कहना है कि, सरपंच पति के पुतला दहन कर विरोध जताने से हो सकता है,उन्हे शर्म आयेगी और वे अपनी गलतियां और जिम्मेदारियां समझ सकेंगे! आदिवासी महिलाएं यह कहकर हंस देती हैं की,जिंदा आदमी का पुतला जलाने में हमें भी शर्म तो आ रही है लेकिन सरपंच पतियों की दखलंदाजी का विरोध किया जाना चाहिए यह प्रथा ना गांव के लिए ठीक है ना महिलाओं के ही हित में है!
जारी :
हमने जितेंद्र कौरव से फोन पर साक्षात्कार कर उनका पक्ष जानना चाहा, , ,








