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*ग्राम पंचायत बसेड़ी : करेली:नरसिंहपुर।*

*महिला सशक्तिकरण धरातलीय स्थिति।*

।। विवेचना ।।

महिला सरपंच रबर स्टैम्प बनकर ही ना रह जाए!

वैसे तो महिला सरपंच की जगह यदि उनके पति ,निकट सम्बन्धी या अन्य रिश्तेदार द्वारा ग्राम पंचायत का कार्य किया जाता हैं ,बैठक आयोजित किए जाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं या हस्तक्षेप करते हैं तो पंचायती राज संस्था के निर्वाचित सदस्य अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थता या दुराचरण की श्रेणी में आता हैं।

किसी भी नियम उल्लंघन होने पर महिला वार्ड पंच, पंचायत समिति जिला परिषद सदस्यों के खिलाफ भी समान कार्रवाई अमल में लाई जाती है लेकिन अधिकारियों की उपेक्षा के चलते सशक्तिकरण की तस्वीर बदरंग दिखाई देती है।

महिला सरपंच का अपने कार्यालयीन समय में कार्यालय पर उपस्थित रहना आवश्यक है लेकिन आमतौर पर महिला सरपंच अपने कक्ष में उपस्थित ही नहीं मिलते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक गांवों के विकास में महिलाओं की भागीदारी क्यों जरूरी है, इसकी गाइडलाइन भी जारी की गई है,इसमें लिखा है कि महिलाएं ही ग्रामीण विकास के कामों में सुझाव दें, महिला हितैषी कामों के क्रियान्वयन में खुद भूमिका निभाएं।

अधिकारी हर बार ही यह कहते हैं कि, जिन ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच है,वहां उसे ही काम करना है, अगर उनके पति ग्राम पंचायत के काम में हस्तक्षेप करते हैं तो हम जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।

मैं यह देखकर हैरान हूं कि,महिला सरपंच पढ़ी लिखी होने के बाद भी चौके-चूल्हे के काम में ही व्यस्त रहती हैं।

सरपंच या पंच के पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर यदि उनके पति या किसी अन्य परिजन द्वारा ग्राम पंचायत या ग्राम सभा की बैठक में भाग लिया जाए तो ऐसी महिला सरपंचों व पंचों को पद से हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है लेकिन लिफाफा प्रथा के चलते अक्सर ऐसे मामलो पर चुप्पी साध ली जाती है।

जारी : 
जल्द ही ग्राम बसेड़ी के सर्वे से संबंधित आंकड़े और तमाम जानकारियां 



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