पंचायत की कमांड महिला सरपंच के हाथ में नही?
ग्राम पंचायत सिवनी बंधी:जनपद गोटेगांव:नरसिंहपुर।
।। विवेचना ।।
सरपंच पति जब खुद ही अपने मुंह से यह कहे कि हमारी श्रीमती तो सरपंच है ही, एक और सरपंच है,वही पंचायत का कामकाज देखते हैं।तब आप इसे दुस्साहस कहेंगे या फिर बेशर्मी?
क्या कोई इंसान पैसों के लिए इतना गिर सकता है कि,अपने गांव और गांव वालों के साथ साथ लोकतंत्र की भी मिट्टी पालित करने पर तुला हो?
थोड़ा भी यदि सोच विचार कर देखेंगे तो ग्राम पंचायत सिवनी बंधी का हाल जानने के बाद आपका जवाब हां में आ सकता है।
अब आप यह कहेंगे की अधिकारी कोई कार्यवाही क्यों नहीं करते?सुनवाई क्यों नही होती?
तब इसका जवाब यह है की,अधिकारियों की मिलीभगत के बिना तो कोई गोलमाल सम्भव ही नहीं है।
अधिकारियों की नाक के नीचे गोलमाल होता रहे और अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए रहें ,भला यह कैसे संभव है?संभव है,जब तक गोलमाल का माल इधर से उधर होता रहे तब तो संभव है?
और यही माल पंचायत में कार्यवाही को लटकाने के कमाल के तरीके खोज लेता है।है ना कमाल!
गांव वाले इतना डरते क्यों है?किस बात का डर रहता है?कोई आपका हक चुरा रहा है और आप चुप हैं!शिकायतों के माध्यम से विरोध भी नहीं कर सकते?
क्या वाकई यह डर जायज है?क्या आवाज उठाने पर निशाना बनाया जाएगा?यही डर भ्रष्टाचार के व्यापार को बढ़ावा दे रहा है!इसी डर का फायदा उठाते हुए कार्यवाही लटका दी जाती है!
महिला सशक्तिकरण के नाम पर पंचायत में चल रहा खेल सिर्फ एक तमाशे से ज्यादा कुछ महसूस नहीं होता।जिस नारी को शक्ति कहा जाता है,वह चन्द भ्रष्टाचारियों के हाथों का खिलौना बनकर रह जाए,तब महिला सशक्तिकरण का नारा महज एक नारा बनकर ही रह जाता है।
जारी :
जल्द ही बड़े खुलासे के साथ होगा चेहरा बेनकाब, ,
