नरसिंहपुर।
हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य की कामना पूरी करने के लिए व्रत रखती हैं, साथ ही अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं, कुंवारी लड़कियां इस व्रत को रखकर ईश्वर से अच्छे वर प्राप्त होने की कामना करती हैं।
हरतालिका तीज की पूजा में फुलेरा बांधने का विधान है।पूजा के वक्त भगवान शिव के ऊपर फुलेरा बांधा जाता है।हरतालिका तीज के पर्व पर महिलाएं नख से शिख तक पूरे 16 श्रृंगार कर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।
हरितालिका तीज के दिन हरे वस्त्र, हरी चुनरी, हरा लहरिया, हरी चूड़ीयां, सोलह श्रृंगार , मेहंदी, झूला-झूलने की परंपरा भी है। इस दिन लड़कियों के मायके से श्रृंगार का सामान और मिठाइयां आती हैं। नवविवाहिताओं के लिए बहुत खास होता है। महिलाएं इस दिन गीत गाती है और झूला झूलती है।
आपको बता दें कि फुलेरा प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और बांस को मिला के बनाया जाता है, इसे हरतालिका तीज त्योहार के दौरान भगवान गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती की भक्ति के प्रतीक के रूप में बनाया जाता है। फुलेरा एक प्रकार का फूलों का झूला है,जिसमे भगवान गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती को बिठाते है हो पूजा के दौरान झूला झुलाया जाता है।देखने में आकर्षक बनाने के लिए इन्हें अक्सर विभिन्न रंगों और सामग्रियों से सजाया जाता है। जो देखने में बुहत सुन्दर लगता है।
जिले के शहरी एवम ग्रामीण क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं ने दिन भर निर्जला व्रत रखा, सुबह सूर्योदय के पूर्व महिलाओं कन्याओं ने स्नान किया, दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम से पूजन का सिलसिला शुरू हुआ। शाम को घरों घर और सामूहिक शहर के मंदिरों में फुलेरा बांध कर पूजा अर्चना की गई।भजन कीर्तन के साथ अन्य धार्मिक आयोजन का दौर जारी है।महिलाएं पूरी रात्रि जागरण भजन गाकर रत जगा की।सुबह फुलेरा, गौर और पूजन सामग्री के विसर्जन के साथ ही व्रत का समापन होगा।

