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*पंचायत में चल रही लूट पर चुप रहना है?*

सरपंच पंचायत नही आते/आती तो इससे तुम्हे क्या करना है चुप रहो!सरपंच पति पंचायत के काम में दखल दे तो भी चुप रहो!

सरपंच और सरपंच पति के अलावा कुर्सी पर बैठने वाला फर्जी सरपंच अपनी मां,पत्नी, छोटे भाई की पत्नी,छोटे भाई को मनरेगा मजदूरी का लाभ पहुचाए तब भी चुप रहो!

अपने जीजा के नाम पर बिलों को पास करे या फिर अपनी बहन के नाम से कागजी कंपनी बनाकर पंचायत का पैसा अपनी तिजोरी में भर ले तब भी चुप रहो!मुक्तिधाम को लूट लिया जाए या खेल मैदान के समतलीकरण की राशि खा जाए तो भी चुप रहो!

क्यों भाई,क्यों रहें चुप?
क्यों की विज्ञापन दिया था!
अरे भाई विज्ञापन दिया था कोई लूट का लाइसेंस थोड़े ही लिया था,लेकिन इतना बोलने की हिम्मत है किसके पास?इसलिए चुप रहना है!

गांव में गांजा बिक रहा हो तो चुप रहो, बिलों में हेर फेर होती रहे पर चुप रहो!गरीब की मनरेगा मजदूरी डकार लें तो भी और किसी का हक मार लें तो भी चुप ही रहना है।

थोड़ा सा नाली निर्माण में हेर फेर किया तो क्या हो गया?चरनोई भूमि पर कब्जा कर लिया तो इसमें इतना शोर क्यों मचाना?गरीब को मनरेगा का लाभ नहीं मिला तो तुम्हे तकलीफ क्यों है? मिड डे मील या सरकारी राशन में से अगर हमने या हमारे लोगों ने थोड़ा सा चुरा भी लिया तो इसमें इतना परेशान होने की क्या बात है?

तुम गांव वालों के लिए इतना परेशान होते हो, अरे डायन भी सात घर छोड़ देती है,लेकिन हमने तो अपनों को भी लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी फिर तो ये गांव वाले हैं!

तुमने देखा नही बेचारे गांव वाले खुद भी तो चुप रहते हैं,और अधिकारी ,क्या उनके बारे में नहीं जानते? वो भी तो चुप रहते हैं!

संविधान, नियम कायदे कानून की धज्जी उड़ाई जाती रहे पर चुप रहो!ग्रामीणों को लूटा जाता रहे या फिर गांव को, लेकिन चुप रहना!

क्या तुम जानते नहीं की, हमारे दादा जी ने क्या किया था/ हमारे पिता जी की के कुख्यात किस्से तो आज भी ग्रामीणों की जुबान पर है/खुद हम पर ही ठगी जैसे न जाने कितने ही प्रकरण कायम हुए, इसलिए अगर चुप नहीं रहोगे तो फिर समझ जाओ, हम क्या कर सकते है!

गांव हमारा है,गांव वाले हमारे हैं,पंचायत हमारी है, अधिकारी हमारे हैं, तो फिर ये सरकारी राशि किसकी हुई,हमारी ही ना! अब हम चाहे गांव को लूटें या गांव वालों को,तुम्हे क्या करना है?तुम्हे बस चुप रहना है!

वरना हम बोलेंगे की पत्रकार पैसा खाते हैं।पत्रकार झूठ फैलाते हैं। इन्हे सिर्फ खोखली धमकियां मत समझो,क्या तुमने देखी नही है खबरें?कितने ही पत्रकार गहरी नींद सुला दिए गए हैं।इसलिए अपने और अपने परिवार का हित चाहते हो तो, भलाई इसी में है कि चुप रहना!

।। व्यंग्य ।।

















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