परिवर्तन की मानसिकता से मतदान :
एक हजार रुपए लाडली बहना को दिए जा रहे हैं अब तो 250 रूपए की बढ़ोत्तरी भी की गई है। सिलेंडर के 600 रूपए खाते में वापस दिए जायेंगे जिससे महिलाओ को सिलेंडर 450 रूपए में पड़ेगा।
ये हालिया खबरें भले ही थोड़ी देर के लिए आपको गुदगुदा दें लेकिन मंहगाई,अपराध और बेरोजगारी आज भी आम आदमी को रुला रही है।
ग्राम रोजगार सहायक, कोटवार, रसोइए, किसान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और नौकरी पेशा वर्ग को अपनी मांगो और अधिकारो के लिए सड़क पर उतर कर धरने प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ा और आज भी आश्वासन के सहारे ही दिन गुजर रहे हैं।
भ्रष्टाचार चरम पर है,गरीब इंसान आज भी योजनाओं की लाइन में खड़ा अपना हाथ मल रहा है जबकि भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार के बूते पर अकूत संपत्ति इकट्ठी कर ली।
जनता महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त हो चुकी है, जिसके कारण लोगों में वर्तमान सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा हो रहा है ,ऐसा न हो की इस आक्रोश का सामना भाजपा को करना पड़े और सत्ता से हाथ धोना पड़े।
चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का इस महंगाई में जीना मुश्किल हो गया है।
आज हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की कर ली है, लेकिन फिर भी कई ऐसे जिले हैं जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।ग्रामीण कहते हैं कि, वोट के समय सांसद विधायक आते हैं और गांव के लोगों को बरगला कर वोट तो ले जाते है पर गांव की समस्या का समाधान नहीं करते हैं।
सरकार बनवाने में ग्रामीणों का विशेष योगदान होता है, लेकिन चुनाव के बाद गांव की तरफ शायद ही कोई जनप्रतिनिधि रुख करता हो। चुनाव जीतने के बाद वह पूरे पांच साल तक उसे भूल जाता है।
यूं तो विकास के इतने दावें सुन चुके हैं कि ऐसा लगता है कि अब जिले में करने को कुछ बचा ही नहीं। वहीं दूसरी ओर समय-समय पर जिले के ग्रामीण अंचलों से ऐसी खबरें भी आती हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है।
जारी :
