।। पानी को तरस रहा भिलमा ढाना, उजाले को तरस रहा कोटरी? ।।
।। विवेचना ।।
नरसिंहपुर जिले के विकास की तस्वीर : एक गांव पानी को तरस रहा है तो दूसरा गांव बिजली को।
संभवतः आपको तस्वीरों को देखकर यही लगेगा, जैसे ये तस्वीरें आजादी के पहले की हैं। लेकिन हकीकत तो यह है कि ये तस्वीरें आजादी के 76 साल पूरे होने के बाद की हैं।
गांव अपने विकास के लिए मुद्दतों से इंतजार कर रहा है लेकिन इस गांव की बदनसीबी देखिए की गांव में आज तक जनप्रतिनिधियों की नजर नहीं पड़ी है और न ही कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
लोग पानी और बिजली न होने की समस्या से जूझ रहे हैं।लोगों ने कई बार बिजली विभाग और जल निगम में अपनी परेशानियों को लेकर शिकायत दर्ज करने की कोशिश की लेकिन आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई है।
गांव को आजादी के दशकों बाद भी विकास की दरकार है।गांव को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ईमानदारी से जो प्रयास होना चाहिए थे वे नहीं हुए। देश तो बदल रहा है, लेकिन आज भी गांव की तस्वीर नहीं बदल रही है।
गांव में इसके अलावा और भी अनेकों दूसरी समस्याएं भी हैं जो सरकार, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि व सरकारी अधिकारियों का मुंह चिढ़ाती रही है।
ग्रामीण नरकीय जीवन जीने मजबूर हैं, आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है और इस गांव से विकास कोसों दूर है।ग्रामीणों के पास बिजली और पेयजल तक कि सुविधा नहीं है।ग्रामीण विकास से कोसों दूर हैं। अब तक शासन प्रशासन की नजर यहां तक नहीं गई है।
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देखिए क्या कहते है ग्रामीण :
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