वो गरीबों को लूटते हैं तो लुटने दो! ,वैसे भी इसमें किसी का क्या जाता है?
किसी गरीब विधवा का पैसा डकार लिया, किसी बूढ़ी औरत की पेंशन खा गए, किसी गरीब का प्र मं आवास हड़प लिया,किसी बच्चे का मिड डे मील बाजार में बेच दिया,किसी विकलांग की पेंशन चाट गए तो इस सबमें तुम्हारा क्या जाता है?सड़क,नाली, शौचालय, व्रक्षा रोपण,आंगनबाड़ी, मुक्तिधाम सब कुछ तो सरकारी है,फिर किस बात की टेंशन?
गांव का विकास नहीं होगा तो मत होने दो! नही जल पाएगा किसी गरीब का चूल्हा तो ना जलने दो! कोई बीमारी में पैसों के लिए तड़पता है तो तड़पने दो! किसी को न्याय ना मिले तो ने मिले! तुम्हारा क्या बिगड़ता है?
अधिकारी तो हैं ना जांच पड़ताल के लिए! पढ़े लिखे लोग हैं,पैसे वाले हैं वो बेचारे क्यों झूठ बोलने लगे भला? जो उन्होंने कागजों पर लिख दिया है वही सच है!अब भले ही कागज कोरे हों तो चिन्ता की इसमें कौन सी बात है?
इंसानी खून के प्यासों ने अपने लालच को पूरा करने के लिए किसी गरीब के घर परिवार की खुशियां उजाड़ दी तो कौन सा बड़ा बवाल मच गया?गरीब तो होता ही है उजड़ने के लिए?संवारने के लिए महल बंगले तो हैं ना!अब भला रेशम के पैरदान में टाट का पैबंद लगाओगे क्या?गरीब तो होता ही है अन्याय,शोषण,उत्पीड़न सहने के लिए! किसी भ्रष्ट को देखा है कभी शोषण का शिकार?
गबन ही तो कर रहे हैं ना सरकारी पैसों का किसी की हत्या तो नही कर रहे हैं?नही बनेगी गांव में सड़क नाली तो कौन सा भूचाल आ जायेगा?गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ नसीब नही होगा तो कौन सा बड़ा पहाड़ टूट पड़ेगा?अरे पढ़ लिख जायेंगे तो फिर मजदूरी कौन करेगा?अत्याचार और उत्पीड़न कौन सहेगा? मिड डे मील बाजार में बेच कर वैसे भी बच्चों का भला ही किया जाता है!वरना इस तरह का अनाज कौन अधिकारी अपने बच्चो को खिलाता है?
तुम्हे मालूम है कितनी मुश्किलों से अधिकारियों से संपर्क और संबंध बनाए जाते हैं?कितनी जद्दो जहद करनी पड़ती है कुर्सी पर अपना दबदबा और रुतबा बनाए रखने के लिए?कितने ही लिफाफे और विज्ञापन का दरिया बहाना पड़ता है?
अगर गांव में विकास हो भी गया तो क्या होगा?बच्चे पढ़ लिख गए तो क्या होगा?गांव की तस्वीर सुंदर दिखाई देने लगे तो भी हासिल क्या होगा?इसलिए खाओ और खाने दो!गांव के विकास को भाड़ में जाने दो?
तुम्हे तो ऐसे विकास पुरुषों को नमन करना चाहिए?सबकुछ उजाड़कर खुद का विकास करना कोई कम हिम्मत की बात है क्या?बड़ा बेशर्म बनना पड़ता है,चापलूसी करनी पड़ती है,अपनी भद्द पिटवानी पड़ती है तब कहीं जाकर एक गबन की रूपरेखा बनती है!
व्यंग्य।
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