https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 

 


ग्राम झामर।

पानी को तरसते स्कूली बच्चे प्रशासन की उस तस्वीर के मुंह पर करारा तमाचा है, जिसमें विकास के नाम पर महज झूठ दिखाई देता है।वैसे तो सरकार बच्चों के लिए सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपए की राशि जारी करती है, लेकिन इस बारे में जानने की जहमत नहीं उठाई जाती की धरातल पर स्थितियां क्या हैं?

ग्राम पंचायत अपने नैतिक दायित्व को निभाते हुए इस ओर कोई ठोस कार्यवाही को लेकर कदम उठा सकती है,लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ दिखाई देता है।



कहीं बच्चे चाय के टपरो पर अपनी प्यास बुझाते हैं,तो कई बार दूर हैंडपंप से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है,बावजूद इसके प्रशासन अब तक मामले से बेखबर बना हुआ है।यह हालात महज झामर और कुसमी के स्कूली बच्चों की नही है बल्कि ऐसे अनेक गांव हैं ,जहां पीने के पानी को लेकर बच्चे परेशान होते हुए दिखाई देते हैं।

नन्हे नन्हे हाथ जो बस्ते का बोझ तक ठीक से उठा नही सकते तपते हुए हैंडपंप से बाल्टी का बोझ उठाकर अपनी और अपने सहपाठियों की प्यास बुझाते हैं,वैसे कोई भी सहृदय व्यक्ति ऐसे दृश्य देखकर भावुक और विचलित हो सकता है लेकिन ना तो प्रशासन की निद्रा अब तक भंग हो सकी है और ना ही, प्रशासन के कानो पर अब तक जूं रेंगी है।

हो सकता है इस बार की गर्मियां भी बच्चो को बॉटल या होटल का गर्म पानी पीकर गुजारनी पड़े क्यों की जिस तरह की कार्यशैली अपनाई जाती है उसे देखकर नही लगता की तत्काल कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

इस बारे में जब कुछ स्थानीय महिलाओं से बात की,तब उनके द्वारा प्रशासन पर व्यंग्य करते हुए कहा गया की, अब तो माता पिता को ही एहतियात बरतते हुए अपने बच्चों के पीने के पानी का इंतजाम स्वयं करना चाहिए ,क्यों की शासन तो सुनवाई कब तक करेगा और करेगा भी या नहीं यह तो भगवान ही जाने!

أحدث أقدم

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर