सरकारी राशन की मारामारी!
राजकुमारी और राधा जैसे और भी अनेक हितग्राही महिलाएं हैं, जो विगत कई दिनों से सरकारी राशन की बांट जोह रही है।
ग्रामीणों का सवाल है की, आखिर क्या वजह है की,मार्च का महीना खत्म होने मे एक दिन शेष बचा है पर जो राशन महीने कि 10तारीख से बाटना चालू हो जाता था अब तक हितग्राहियों को नहीं मिल पाया है?
गरीबों तक राशन पहुंचाने के शासन तमाम प्रयास कर ले, लेकिन कालाबाजारी के कारण हितग्राहियों तक समय पर राशन पहुंचना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।
विश्वसनीय सूत्रों की माने तो सरकारी अनाज की कालाबाजारी और घोटालों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
नाम ना छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि विक्रेता राशन को अवैध तरीके से बेच देते है,जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है!
रहमा बालो को राशन बसुरिया मे मिलता है, और बेरखेड़ी बालो को अमाड़ा में।विगत दिनों पलैरा पचायत मे 6 महीने से राशन नही बाटा गया था,तब ग्रामीणों ने राशन के लिए धरना दिया था,इसके बाद प्रशासन ने ग्रामीणों की सुध ली थी और तब कहीं जाकर 6 महीने का राशन मिल पाया था।
इतना ही नहीं ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां राशन वितरन के कार्य में अनियमितताएं बरती जा रही है। परंतु अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने गरीब की भूख पर ध्यान देना बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और खाद्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा इलाके के बेबस और लाचार ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीण जनता को जिम्मेदार जवाब दें की, राशन बाटने बाले आखिर क्यो समय पर नही राशन वितरण कर रहे हैं?
गरीब कि थाली का राशन गरीबो के घर आखिर कब पहुंचाया जाएगा?क्या यही है सबका विकास सबके साथ?जहां एक ओर पूंजीपति तो विलासिता का उपभोग कर रहे हैं,लेकिन गरीब आज भी दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहा है!
विभाग द्वारा ग्रामीणों को आश्वासन तो दिए जाते हैं कि, जांच कराते हैं, और यदि कमियां होंगी तो कार्रवाई भी की जाएगी।लेकिन बावजूद इसके विभाग अब तक ठोस कदम उठाने में तत्परता नही दिखा रहा है।
