नरसिंहपुर।
जहां एक ओर जिलेवासी आम समस्याओं से त्रस्त हैं,वहीं दूसरी ओर चाटुकार विलासिता की गोद में आराम फरमा रहे हैं।
अपने आकाओं के तलवे चाटने वाले चाटुकार आलोचनात्मक और विश्लेषक लेख कैसे लिख सकता है?
सियासी चापलूसी का चोगा पहनकर अपवाद जिले की आम जनता को अपनी सत्यवादी हरिश्चंद्र की छवि से अवगत कराना चाहते हैं।
चाटुकार अपवाद यह बताना चाहते हैं की वो मोह माया से पूरी तरह दूर हैं।वैसे चाटुकार होना इतना सहज नहीं है,चाटुकारों की भी अपनी समस्याएं है,जैसे समय कम है और चापलूसी ज्यादा करनी है।वैसे अगर चापलूसी से सत्ता और कुर्सी के ढोल पूरे जिले में गूंज सकते हैं तो फिर गुरेज कैसा?
कुछ चाटुकार अपवादों ने अपना पक्ष भी रखा और कहा की आपके इन सिद्धांत वगैरह से काम नहीं चलेगा, कुछ सीखो।ये चेतावनी थी या सलाह मैं इसे आज तक नहीं समझ सका।
वैसे अवसरवादी चापलूस चापलूसी को कला मानते हैं।चापलूसी वो बला है, जिसके जरिए असंभव लगने वाले काम भी संभव हो जाते है।
जाहिर सी बात है कि चापलूसों को मुफ्त की दारू मुर्गा पार्टी भी बहुत सुहाती है,भोजन की टेबल पर बैठकर आका के गुणगान कर भोजन करने से चापलूसो को जो आत्मिक शांति प्राप्त होती है, वह घर पर परिवार के साथ भोजन करने से भला कहां मिल पाती है।
चापलूसों की महानता का बेहरीन उदाहरण है की अयोग्य सम्मान समारोह में सम्मान पाते हैं और योग्य को दरकिनार कर दिया जाता है।एक दूसरे को सम्मान देने का यह खेल सार्वजनिक तमाशे के रूप में सामने आता है।हर रोज हर जगह हर कोई हर किसी को सम्मान देने का खेल खेल रहा है।
हालाकी जिस जनता के सामने ये तमाशा किया जा रहा हैं वो आम जनता भी छली जा रही है, बेवकूफ समझी जा रही है।
जिले में ऐसे चाटुकारों ने जनता के हर भरोसे को तोड़ा है। लोगों की भावना से खिलवाड़ किया है।
सत्ता के संरक्षण में चापलूस बिना खौफ अपनी अवांछनीय गतिविधियों को अंजाम देने से भी नही कतराते हैं।जिससे आम जनता की उम्मीदों पर पानी फिरा है।
फोटो खिंचवाने और हाथ मिलाने की होड़ को देखकर ऐसा लगता है जैसे गरीबों के मोहल्ले में कोई मुफ्त की रेवड़ी बांटने आ गया हो।
चापलूसों की फोटो खिंचवाने की होड़ के दृश्य को देखकर कोई भी मुस्कुराए बिना नही रह सकता है।सत्ता और प्रशासन से सवाल पूछने के बजाय अधिकारियों और नेताओं के साथ सेल्फी खिंचवाने में मस्त और व्यस्त चापलूस तस्वीरों को सच बताने के खेल में उलझे रहते हैं तब ऐसे हालात में निष्पक्षता और न्याय की उम्मीद बेमानी हो जाती है।
नरसिंहपुर जिले की जनता के साथ छल और विश्वासघात का सिलसिला बदस्तूर जारी है।तस्वीरों के तमाशे में जनता को उलझा कर भ्रमित करने वाले गरीब की लाश पर पैर रखकर सफलता की सीढ़ियों पर अग्रसर होने की कामना करने वाले कितना और किस तरह न्याय कर पाएंगे?
