ग्राम पंचायत बेलखेड़ी।
अक्सर देखने और सुनने में आता है की फलां पंचायत में फलां योजना के नाम पर अमुक सरपंच या सचिव द्वारा भ्रष्टाचार किया गया।गांव के विकास कार्य के लिए आए बजट को लेकर होने वाली धांधली की खबरें आए दिन मीडिया में सुर्खियां बटोरती नजर आती है।अधिकांश ग्राम पंचायतों में हालात यह है कि, सरपंच,सचिव और जीआरएस की तिकड़ी मिलकर नए नए हथकंडों के जरिए जेबें गर्म करने की जुगत में नियम कायदों को ताक पर रखकर ग्रामीणों के हक पर डाका डाल रहे हैं?
इतना ही नही कुछ तिकड़ियां तो बकायदा बताते हुए गर्व महसूस करती हैं की, किस अधिकारी और किस अपवाद को कितना हिस्सा या लिफाफा उनके द्वारा दिया जाता है।इसे बेशर्मी कहेंगे या ढिठाई, ये तिकड़ियां बड़े ही शातिराना अंदाज में स्वीकार भी करती हैं कि, घोटाला करने से ख़बर न लगने तक के खेल में पानी जैसा पैसा बहाया जाता है।सबको एक निश्चित हिस्सा पहुंचाया जाता है।
सरपंच और सचिव खुलेआम कहते हैं की, यह काजल की कोठरी है यहां दाग तो लगेगा ही इसलिए हम भी भ्रष्टाचार की गंगा में सबके साथ बह रहे हैं।नाम ना छापने की शर्त पर सचिव ने बताया कि पंचायत में अगर फर्जी बिल लगवा कर पैसा न निकाल तो अधिकारियों से लेकर अपवादों तक को लिफाफे क्या हम जेब से देंगे!यह पूछने पर की आखिर निर्माण कार्यों में की गई भ्रष्टाचार की रकम भी तो हाथ आती है तब अलग से फर्जी बिल लगाने की आवश्यकता क्या है?तब बताया गया कि निर्माण कार्यों और अन्य शासकीय योजनाओं में की गई धांधली का पैसा तो ऊपर तक एक निश्चित रकम के तौर पर पहुंचता है, उसके बाद और भी तमाम तरह के चिंदी चोर हैं जिन्हे भी भुगतान करने होते हैं।यह पूछने पर की ये चिंदी चोर कौन है?सचिव मुस्कुराते हुए कहता है की चिंदी चोरों के कारनामे और फेहरिस्त बड़ी लंबी है इस बारे में फिर कभी बात कीजिएगा?
आए दिन देखने में यह भी आ रहा है की शिकायतों के अनुपात में निराकरण काफी कम है,यही वजह है की शासन की लचर कार्य शैली का फायदा उठाते हुए सरपंच, सचिव और जीआरएस द्वारा अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए गांव और ग्रामीणों के विकास के लिए आई सरकारी राशि की बंदरबांट की जाती है।
कुछ ऐसे ही हालात ग्राम बेलखेड़ी में देखने को मिले।जहां गांव में अराजकता अपने पैर पसार रही है।मूलभूत कार्यों और हितग्राही मूलक योजनाओं में लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही है बावजूद इसके अब तक कोई अधिकारी ठोस कार्यवाही नही कर रहा है।
ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर वार्ता के दौरान दबी जुबान में कहा कि पंचायत के जिम्मेदार ही गांव के विकास में रोड़े अटका रहे हैं।
गांव में आंगनबाड़ी,नाली,बिजली,सफाई,स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्दे नजर उठाए जाने एहतियात के मुद्दों पर पंचायत की कार्यशैली लीपापोती कर पलीता लगाने वाली कही जा सकती है।
व्यंगात्म लहजे में ग्रामीणों ने कहा कि सरपंच,सचिव,जीआरएस और गांव में से किसका विकास ज्यादा हुआ है, यह भी कोई बताने की बात है!
ग्राम पंचायत की लापतवाही का ही नतीजा है कि विकास सिर्फ कागजों में दिखाई देता है।जबकि धरातल पर समस्याओं का अंबार लगा है।
