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नरसिंहपुर।

बापू,नेहरू और हिंदू मुस्लिम पर बातें कर मुद्दों से गुमराह करने वालों को भी जिलेवासियों को पहचान लेना चाहिए,क्यों की ये वही लोग हैं, जो इन मुद्दों की आड़ में आपके वर्तमान से खिलवाड़ और भविष्य का सौदा कर रहे हैं।

वैसे मुद्दों पर मूक दर्शक हो जाने का तात्पर्य यह भी है कि अप्रत्यक्ष तौर पर सहायक हो जाना।सहायक हो जाने से तमाम सहुलियतों तक पहुंच आसान हो जाती है।जरा सा भी गौर करें तो सोशल मीडिया पर आप पाएंगे कि तमाम ऐसे मुद्दे जो जिले की जनता के लिए गैर जरूरी हैं,उन्हे हाई लाइट कर जरूरी मुद्दों को हाशिए पर धकेला जा रहा है।ताकि टेबल के नीचे से लिफाफा आ सके! शायद यह ज्यादा जरूरी है?

और आर्थिक असमानता को छिपाए जाने के लिए ऐसा होना भी चाहिए?अन्यथा आम आदमी के सच जानने के बाद गंभीर संकट और सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

आम जनता को गुमराह करने की साजिश में शामिल चेहरों से पर्दा हटना भी चाहिए लेकिन क्या यह इतना आसान है।

ऐसे हालात में कानून व्यवस्था के निष्पक्ष होने पर भी संदेह और सवाल का उठना लाजमी है।हालाकी प्रशासन द्वारा जिले में अमन चैन के दावे लगातार किए जाते रहे हैं,लेकिन खुलेआम गोली चलने और बलात्कार की खबरों के बीच ये दावे भी संदेहास्पद लगने लगते हैं।

सुव्यवस्था और सुशासन की पोल खोलती तस्वीरों को झुठलाया नहीं जा सकता।हां यह जरूर है की कुछ समय के लिए अनदेखी का शिकार जरूर बनाया जा सकता है।

क्या वजह है की,जैसी उम्मीद प्रबुद्ध वर्ग से की जाती है उसके अनुरूप वह भी अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त नही कर सका।खबर और खुलासों के बीच आम आदमी की आम बात दबकर कहीं दफन होती लगती है।क्या यह खौफ है या कुछ और , , , , , ?

सच को नकारात्मक से कहने से कुछ देर के लिए एक भ्रम पैदा तो अवश्य किया जा सकता है,लेकिन इससे वास्तविक हालात नही बदलने वाले।

आज भी जिले में हजारों युवा बेरोजगार हैं,ना जाने कितने ही घरों में आज भी कई बार शाम का चूल्हा नहीं जलता,सैकड़ों वृद्ध यहां वहां से मांगकर गुजारा करने के लिए मजबूर हैं,बढ़ती मंहगाई के चलते उत्तम इलाज और उच्च शिक्षा मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर निकल आने के लिए छटपटा रहा है,इस सबके बावजूद अगर यह बताया जा रहा है कि सब कुछ ठीक है तब जिले की आम जनता को भी मान ही लेना चाहिए क्यों की जिम्मेदार अगर कह रहे हैं, तो ठीक ही होगा (वैसे तो कभी यह भी पूछ ही लेना चाहिए की आपके अपने ही क्षेत्रों में क्या बदलाव अब तक आए?),अब भला आम जनता जिम्मेदारों से सवाल पूछकर घर बैठे मुसीबत क्यों लें?जबकि जिन्हे पूछना चाहिए वे ही चुप्पी साधे हों!

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