नरसिंहपुर।
गर्मी अपने शबाब पर आने के लिए बेकरार है,मार्च के महीने में ही सूरज का पारा सातवें आसमान पर पहुंचता हुआ महसूस होने लगा है।
प्रशासन पेयजल की स्वच्छता और सहज उपप्धता को लेकर कितने भी दावे करे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है।
यदि हम शहर हैंडपंप की ओर नजर डालें तो पाते हैं कि,अधिकांश स्थलों पर साफ-सफाई के अभाव में हैंडपंप के आसपास गंदगी पसरी हुई है।
गर्मी के चलते राह से गुजरते राहगीरों को हैंडपंप के पास गंदगी होने के कारण बाजार से पानी लेकर खरीदना पड़ रहा है।
कई जगहों पर तो यह स्थिति है की हैंडपंप के आसपास गंदे पानी के जल भराव से सड़न और बदबू का सामना करना पड़ रहा है,वहीं जल भराव के चलते मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है,जिसके चलते स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि, क्या हैंडपंपों का पानी पीने लायक है भी या नहीं?
हैंडपंप के आसपास मौजूद गंदगी के चलते राहगीर एवम क्षेत्रीय जन पानी पीने से परहेज कर रहे हैं।
ऐसे ही हालात स्कूलों में लगे हुए हैंडपंप के आसपास भी हैं।जहां बच्चों को दूषित पेयजल व्यवस्था के बीच अपने स्वास्थ्य को खतरे में डालते हुए पीने के लिए हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।जिसके चलते उल्टी,दस्त,पेट एवम लिवर से संबंधित समस्याओं के बढ़ने का अंदेशा बना रहता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थितियां और भी बदतर है जहां ग्राम पंचायत द्वारा हैंडपंप के रख रखाव और स्वच्छता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गर्मी के साथ ही पानी की किल्लत भी सामने आने लगती है।नल को खुला छोड़ देना,गाड़ियों की धुलाई, सड़कों तथा गलियों को बेवजह पानी से धोना जैसी बातों पर स्थानीय निवासियों को भी ध्यान देना चाहिए।
कंदेली,शंकर वार्ड और गुरुद्वारा मार्ग पर अधिकतर नलों की टोटियां गायब हो गई हैं, जिसकी वजह से पानी व्यर्थ बहता रहता है।
इस तरह पानी की बर्बादी चिंताजनक है।
जल की बर्बादी के कारण आगामी दिनों में स्वच्छ जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
शायद पानी के प्रति जिलेवासियों की लापरवाही को देखते हुए स्थानीय होटल संचालक भी पानी बेचने को मुनाफे का सौदा समझने लगे हैं,यहां तक कि कई होटल पर तो नाश्ते - खाने के बाद पानी भी खरीदना पड़ता है।क्या होटल,कैफे इत्यादि में निशुल्क पेयजल व्यवस्था को खतम करने के लिए सोची समझी रणनीति अपनाई जा रही है?
