https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 

 






ग्राम बसुरिया।

अतिक्रमण कारियो के हौंसले बुलंद हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक उदासीनता जिम्मेदार है?

यह प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का ही नतीजा है कि, चरनोई भूमि पर लगातार अवैध अतिक्रमण कर फसल का लाभ लिया जा रहा है, लेकिन अब तक कार्यवाही के नाम पर महज दिखावा किया गया।

अधिकारी तमाम तरह की बयानबाजी तो हर बार करते हैं, लेकिन नतीजे सिफर ही नजर आते हैं!

ग्राम पंचायत गहन कुंभकर्णी निद्रा में लीन है,जनादेश से चुनकर आए ग्राम प्रधान से लेकर शासकीय सेवक (सचिव,जीआरएस इत्यादि) अपना दायित्व किस प्रकार निभा रहे हैं,यह गांव की तस्वीरें स्पष्ट कर देती है।

वर्तमान हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि, ना तो ग्राम प्रधान और ना ही सचिव,जीआरएस गांव के विकास की दिशा में ठोस रूपरेखा बनाते हुए साकारत्मक कदम उठाने की दिशा में विचार भी कर रहे हैं।

आज उस लोकतंत्र की आत्मा जरुर कराह रही होगी, जिसकी कल्पना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी।

नाम ना छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीण कहते हैं कि लिफाफों का सिलसिला जारी है यही वजह है की सावन के अंधों को सिर्फ हरियाली नजर आ रही है।क्या ग्राम पंचायत और क्या अतिक्रमण कारी और क्या अधिकारी सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं।

आखिर यह प्रशासन किसके इशारों पर चल रहा है?क्या नियम और कानून सिर्फ कमजोर और गरीब के लिए है?

यह अराजकता अतिक्रमण कारियो की वजह से है, या अधिकारियों की वजह से?

यदि प्रशासन ठोस कदम उठाता तब क्या अतिक्रमण कारी अपने कदम पीछे नहीं खिचते?

ऐसे हालात में प्रशासन की कार्रवाई पर सवालियां निशान खड़े होना लाजमी हैं।

गौ वंश को लेकर जिले में तमाम तरह की राजनीतिक और धार्मिक बतोलेबाजीयां की जाती रही हैं,अभियान संचालित किए जाते रहे हैं,लेकिन इसका लाभ किसे पहुंचा है?

क्या ग्रामीणों की चरनोई भूमि को अतिक्रमण मुक्त देखने की चाह दिवास्वप्न साबित होगी?

चरनोई भूमि को कृषि योग्य बनाने पर कब लगेगी रोक?

क्या गांवों में पशुओं को चरने एवं विचरने के लिए भूमि नहीं बच पाएगी?


Previous Post Next Post

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर