ग्राम अमाड़ा।
गरीबों तक राशन न पहुंचने की खबर के बाद प्रशासन ने आनन फानन में राशन पहुंचाने की व्यवस्था तो की, लेकिन तपती दुपहरी में आए ग्रामीण को होने वाली असुविधा पर ध्यान नहीं दिया गया।
सुबह दस बजे से आकर बैठे ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटने लगा,महिलाएं जो छोटे छोटे बच्चों के साथ आई हुई थी, उन्हें और भी विकट स्थितियों का सामना करना पड़ा।तपती धूप में पेड़ के नीचे बैठकर राशन का इंतजार कर रही महिलाओं के समूह के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाई गई।
खबर लिखे जाने तक लगभग पचास हितग्राही अनाज लेने के लिए परेशान होते रहे,अव्यवस्थाओं को लेकर महिलाओं और ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया।
धूप से बचने और पेयजल के इंतजाम को लेकर भी ग्रामीण आक्रोशित नजर आए।
दुकानदार तो अंदर बैठकर आराम से राशन बांट रहा है।लेकिन,धूप में खड़े होने के कारण कुछ महिलाओं को चक्कर और घबराहट जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आखिर तपती गर्मी में भी दुकान में पेयजल और छांव की उचित व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी है?
