नरसिंहपुर।
जिले में भ्रष्टाचार समाप्त हो गया है,मनरेगा मजदूरों को पर्याप्त काम और मजदूरी बिना रुकावट के प्राप्त हो रही है,लोग मंगल गीत गा रहे हैं,गरीबी और बेरोजगारी दूर दूर तक नजर नहीं आती,स्वच्छता के मामले में तो मिसाल कायम कर दी है,बलात्कार और गोलीबारी की घटनाएं सिर्फ यहां किस्से कहानियों में सुनाई देती है,रिश्वत खोरी का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया गया है!
आप सोच रहे होंगे यह सब अचानक लिखने का कारण क्या है?जबकि वास्तविकता से सभी परिचित हैं?
दरअसल जब भी भ्रष्टाचार की खबर आम जनता के सामने आती है, तब अक्सर अप्रत्यक्ष तौर पर दबाव डालने की अनेक घटनाएं भी सामने आती है।
ताकि आम जनता सच्चाई से रूबरू न हो सके।प्रलोभन से लेकर देख लेने तक की धमकियां बताती हैं की,सच को सामने आने से रोकने के लिए किसी भी हद से गुजरा जा सकता है?
लेकिन क्या सिर्फ खबरे रोक देने से सच पर पर्दा डाला जा सकता है?क्या धमकियां बताएंगी अब की कौन सही है?, और कौन गलत?
क्या ऐसे लोगों का कानूनी नियम और विभागीय जांच से विश्वास उठ गया है?क्या संविधान और कानून पर ऐसे लोगों की आस्था नहीं बची?
और यदि ऐसा नहीं है,तब धमकियों और प्रलोभन का इस्तेमाल कर क्या बताने की कोशिश की जाती है?
यदि किसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो तंत्र की विभिन्न विभागीय शाखाएं जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं,और शिकायत कर्ता को संतुष्ट करती हैं,की जनहित के कार्य में किसी तरह का भ्रष्टाचार किया गया है या नहीं।किंतु विभागीय जांच के पूर्व ही साम दाम दण्ड भेद के जरिए संतुष्ट करने की प्रक्रिया लोकतंत्र के साथ भद्दा मजाक है।
