नरसिंहपुर।
पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही और सख्ती के बावजूद जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गांजे की खुलेआम बिक्री से जाहिर होता है कि नशे के कारोबारियों के हौसले किस कदर बढ़ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार शहर के रेलवे स्टेशन क्षेत्र,रोंसरा,गुरुद्वारा एवम झिरना क्षेत्र में गांजा बेचने वाले लगातार सक्रिय हैं।वहीं ग्रामीण इलाकों की बात करे तो समनापुर ,मुंगवानी ,करेली,बरमान,बरहेटा,नयागांव,केरपानी,सुरवारी, ,उमरिया इत्यादि अन्य गांवो में भी पाउडर, गांजा और अवैध शराब बिक्री की चर्चाएं भी जोर पकड़ती रही हैं।
एक ओर जहां मध्य प्रदेश शासन ने नर्मदा नदी की पवित्रता पर विचार करते हुए अनेक नियम बनाए किंतु वहीं दूसरी ओर पवित्र नगरी बरमान के बस स्टैंड क्षेत्र से लेकर नर्मदा के तट तक शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजेबल ग्लास और गांजा पीने वालों को बैठक के दृश्य आम हैं।
लेडी डॉन,कोरी जैसे असामाजिक तत्व न केवल युवाओं को बल्कि स्कूली बच्चों को भी नशे की खाई में धकेलकर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं।
बीस रुपए और पचास रुपए में मिलने वाली जहर की पुड़िया का खेल लंबे अरसे से बदस्तूर जारी है।सूत्र बताते हैं की ड्रग माफिया की अंदरूनी पैठ के चलते नशे के कारोबारी शहरी और ग्रामीण रहवासी इलाकों में खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं।
स्थिति बदतर होती जा रही है,नशे की गिरफ्त में पड़कर अनेक परिवार और जिंदगियां तबाह हो गई है।महिलाओं और बच्चों पर भी इसके दुष्परिणाम नजर आने लगे हैं।आधुनिकता के नाम पर पार्टियों में नशे का चलन ट्रेंड कहलाने लगा है।नशे की लत का शिकार सिर्फ अशिक्षित और मजदूर ही नही है बल्कि तनाव और अवसाद से बचने के लिए शिक्षित वर्ग भी नशे की ओर अग्रसर होता जा रहा है।
विशेष रिपोर्ट stringer24 पर।