नरसिंहपुर।
जिले में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का व्यापारिक इस्तेमाल आम हो चुका है।
ढाबों और रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ते की दुकानों और ठेलों पर रसोई गैस सिलेंडर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है,लेकिन आंखों मूंद कर बैठा प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी बदतर है।कई बार ऐसे इलाकों में डेढ़ से दो माह में बड़ी मुश्किल से गैस सिलेंडर पहुंचाए जाते हैं किन्तु होटल/ढाबा/स्टाल संचालकों को यह सहजता से उपलब्ध हो जाते हैं।
वहीं दोनों सिलेंडर के दामों में काफी अंतर होने के कारण अधिकांश दुकानदार घरेलू सिलेंडर का ही उपयोग करते हैं।अनेक दुकानदार तो कार्रवाई से बचने के लिए सामने तो व्यावसायिक सिलेंडर रख देते हैं किन्तु अंदर घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है। हालाकी प्रशासन का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति व्यापार करने के लिए घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहा है। तो यह नियम विरुद्घ है।प्रशासन का तो यह भी कहना है की व्यावसायिक कनेक्शनधारी गैस सिलेंडर की रिफिलिंग नहीं करवाते हैं तो लंबे समय तक रिफिल नहीं कराने वाले संयोजनों को सीज भी किया सकता है।यह और बात है की ऐसा मात्र कहा जाता है कोई पुख्ता कार्यवाही नही की जाती।
किंतु आखिर क्यों नियम के उल्लंघन पर आखिर कोई कार्यवाही क्यों नही की जाती ?
दबी जुबान में स्थानीय लोगों ने बताया कि शायद सेटिंग हो गई होगी इसलिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।तब हमने जानना चाहा यह सेटिंग का क्या मामला है इस विषय पर आगे चर्चा में बताया गया की कथित तौर पर सेटिंग से आशय है की संबंधित विभाग के जिम्मेदारों तक उनका हिस्सा पहुंचाया जाता है।रसोई गैस के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना हैरत में तो डालता ही है साथ ही अनेक संदिग्ध सवालों
वजह जो भी हो लेकिन यह आम आदमी के साथ ज्यादती है।सब्सिडी छोड़ने में रुचि न दिखाने के चलते आम जनता को रसोई गैस के दामों पर कोई ठोस राहत तो नही मिली उल्टा सब्सिडी वाले गैस का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाना गरीब के मुंह पर तमाचा है।जबकि व्यापार के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उपयोग करना अनिवार्य है।