देश प्रदेश।
मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव की तिथि घोषित हो गई हैं।
हालाकी विगत दिनों पंचायतों में जिस प्रकार की संदिग्ध कार्यशैली पाई गई और घोटालों की श्रंखला सम्पूर्ण कार्यकाल पर्यंत महज शिकायतों और जांच के खेल में उलझाकर रखी गई उससे यह स्पष्ट हुआ की ग्रामीण जनता की परेशानियों की परवाह नहीं की गई। जिम्मेदार झूठे आश्वासनों और कोरी बयानबाजी से आम आदमी को बहलाने और झूठे हमदर्द बनने की कोशिश में लगे रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों की जनता की लोक सेवक और जिम्मेदार जिस तरह उपेक्षा और अनदेखी करते रहे हैं, उससे यह अनेक मौकों पर यह स्पष्ट हुआ कि जनता की परेशानियों और दुख दर्द की चिंता किसी को भी नहीं है।ऐसी स्थिति में ग्रामीण रहवासी अपने को ठगा हुआ महसूस करने लगे।ऐसा प्रतीत हुआ जैसे लोक सेवक और जिम्मेदार अधिकारी मिलकर ग्रामीण जनता को बेवकूफ बना रहे हैं।अनेक भ्रष्टाचारियों का असली चेहरा भी कई बार जनता के सामने आ चुका है ।
हालाकि ग्रामीण अंचलों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठते विरोध के स्वरों और शिकायतों की फेहरिस्त ने यह बताया है की ग्रामीण क्षेत्रों में अब जनता जाग गई है।अब जनता को मूर्ख समझने और वादों/आश्वासनों में उलझा कर रखने वालों की चाल सफल नहीं होगी।
पांच सालों तक लोगों से दूर रहने वाले अब घर घर दौड़ लगाएंगे।किसी की ना सुनने वाले भी लोगों के सामने नत मस्तक होंगें।
चुनाव से पहले हर बार कई वादे किए जाते हैं किन्तु जो समझ गया वही समझदार है अन्यथा चुनाव में जनता कई बार मूर्ख भी बना दी जाती है।हालाकि मतदाता भी इस बार जागरूक हैं।जनता को विगत अनुभवों से सीख लेते हुए ऐसे उम्मीदवार को वोट करना चाहिए जिसकी सामाजिक छवि साफ सुथरी हो जो न स्वयं गलत मानसिकता रखता हो और न ही किसी के गलत आचरण करने के लिए सहयोग करे।