ग्राम बचई।
महाकौशल शुगर मिल की लापरवाही का खामियाजा भुगतने को मजबूर स्थानीय निवासियों और राहगीरों को व्यथा सुनने वाला कोई है ऐसा दूर दूर तक प्रतीत नहीं होता।
चिमनी के जहरीले धुएं और डस्ट की लगातार बारिश के बीच पढ़ते हुए बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य की महज कल्पना की जा सकती है।
पूछा गया कि क्या उन्हें सांस लेने में तकलीफ तो नहीं होती तब नाम ना छापने की शर्त पर बताया गया की बुजुर्गों और बच्चों को सांस फूलने की शिकायत अक्सर सामने आती रहती है किंतु हम गरीबों की सुनने वाला कौन है?
जब इंसान की सुध नहीं ली जा रही हो तब मूक प्राणियों के बारे में कौन सोचेगा।ऐसे ही हालात से जूझते मवेशियों का झुंड फैक्ट्री से निकले अपशिष्ट को अपना भोजन बना रहा है।जिसकी वजह से दुधारू पशुओं के दूध और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
ख़बर विस्तार से stringer24news पर।