नरसिंहपुर।
जिले में आगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना खटाई में पड़ती नजर आती है।अधिकांश विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्तिथि और मध्याह्न भोजन में सामंजस्य दिखाई नहीं देता है।
कभी बच्चे कम है या उपस्थित नहीं है तब भी भोजन बना दिया जाता है।कभी प्रदान किए जाने वाले भोजन की मात्रा कम पड़ जाती है तो कभी मेनू अनुसार भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता है।हालाकि जांच अधिकारी केंद्रों पर जांच हेतु पहुंचते हैं किन्तु गुप्त सूत्रों के अनुसार जांच भी पूर्वाग्रह पर आधारित होती है।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्व सहायता समूह के सदस्यों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जो ईमानदारी से काम करते हैं उन्हें अनदेखा किया याता है,लेकिन जो सांठ गांठ कर लेते है उन्हे सबको खाने खिलाने के बराबर मौके प्रदान किए जाते हैं।जबकि इस बारे में शिकायत करने की चर्चा पर भी झूठे आरोपों में फंसा कर निकाल देने का दबाव बनाया जाता है ताकि सच को छिपाकर रखा जा सके।
वहीं मध्याह्न भोजन बनाने वाले कुछ स्व सहायता समूह भी चंद सिक्कों के लालच में भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता की अनदेखी कर बच्चो की जान से खिलवाड़ करने में नही चूक रहे हैं।
वहीं प्रशासन इस मामले में कितना सहज है यह तो विभिन्न क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों की दशा स्वयं ही बयां कर देती है।
आंगनबाड़़ी केंद्रों और विद्यालय के परिसरों में असामाजिक तत्वों और स्थानीय निवासियों द्वारा शराबनोशी के निशान सहजता से दिखाई देते हैं किन्तु जिम्मेदार स्थिति से अनजान बनते हुए चुप्पी साधना श्रेयस्कर समझते हैं।हालाकी इस स्थिति के बारे में शिक्षक समूह अक्सर बताते हैं की कई बार उनके द्वारा खुद शराब की खाली बोतलें और ग्लास उठाकर फेंके जाते हैं।
वहीं ग्रामीणों की माने तो बच्चों से खाली शराब की बोतल,डिस्पोजल ग्लास,सिगरेट इत्यादि वस्तुओं को उठवाकर फिकवाया जाता है।
ग्राम देवा कछार,समनापुर,चांदन खेड़ा,उमरिया, बेदू, करकबेल इत्यादि अनेक गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों को ऐसी स्थिति से आए दिन दो चार होना पड़ रहा है।
एक तरफ कोने में रखे हुए हैं।अधिकांश क्षेत्रों में मध्याह्न भोजन चूल्हे पर पकाया जा रहा है। ऐसा प्रतित होता है जैसे जानबूझकर स्वच्छता की ओर ध्यान दिया जाना शायद जरूरी नहीं समझा जाता है।कुपोषण दुर भागने और बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित करने की कवायद कहीं भ्रष्टाचार से कमाई की कवायद बनकर ना रह जाए अतः जिम्मेदार विभागों द्वारा नियम सख्ती से लागू करवाए जाने चाहिए ताकि बच्चों के अधिकार पर डाका ना डाला जा सके।