देश प्रदेश।
कुछ समय पूर्व ही जबलपुर हाई कोर्ट के फटकार लगाने के बाद की बिना परमिट और उचित दस्तावेज के ऑटो कैसे सड़क पर दौड़ रहे है। कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में राज्य सरकार से कहा है कि यदि आप बेलगाम सवारी ऑटो पर अंकुश नहीं लगा सकते तो हम किसी अन्य एजेंसी को ये काम सौंप देंगे।उसके बाद से ही प्रदेश के शहरों में नियम का उल्लंघन करने वाले ऑटो चालकों पर आरटीओ विभाग द्वारा सख्ती बरती जा रही है।प्रदेश में लगभग 6000 हजार ऑटो अवैध तरीके से चल रहे हैं। दरअसल ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा बिना उचित दस्तावेज और परमिट के रिक्शा चलाए जा रहे थे।सवारियों से अभद्रता,नशे में वाहन चलाना,महिलाओं से बदतमीजी और क्षमता से अधिक सवारी बैठाए जाने और अनाप शनाप किराया लेने जैसी घटनाऐं आम हो चली थी।जिससे एक ओर दुर्घटना का डर तो बना ही रहता था वहीं यात्रियों में सुरक्षा को लेकर भय भी व्याप्त था।लंबे अरसे से ऑटो रिक्शा चलाने वाले कोर्ट के फटकार लगाने तक दस्तावेजी कार्यवाही पूरी नहीं कर सके थे। नियम और शर्तों का उल्लंघन कर रहे अवैध ऑटो चालकों की धमाचौकड़ी पर नियंत्रण करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने के मद्देनजर मजबूरी में न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना पड़ा।हालाकि ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा कार्यवाही का दबे स्वर में विरोध किया किंतु गया अधिकारियो द्वारा की जाने वाली कार्यवाही को गलत कहना ना सिर्फ न्यायालय और न्याय प्रक्रिया की अवहेलना है बल्कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ करना भी है।
किंतु कुछ अधिकारी तैश में आकर अपना विवेक खो बैठे और अवैधानिक तरीके से ऑटो चालकों को डराने धमकाने लगे।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कथित जबलपुर आरटीओ अधिकारी ऑटो चालकों को धमकी देते नजर आ रहे हैं की यदि ऑटो सड़क पर नजर आए तो सौ ग्राम गांजा रखवाकर तुम्हे जेल भिजवा देंगे।अब सवाल यह है की क्या कार्यवाही के नाम पर ऑटो चालकों से इस तरह का व्यवहार किया जाना उचित है?यदि ऑटो चालक अब भी मनमानी पर उतारू हैं तो कोर्ट को अवगत कराकर कार्यवाही की जा सकती है किंतु इस तरह गैर कानूनी बातों से धमकाकर अधिकारी किस तरह की ड्यूटी निभा रहे हैं यह अत्यंत महत्वपूर्ण और चिंता का विषय है।