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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

रिश्वत ली क्या अधिकारियों ने?खमरिया (रीछई):जनपद करेली

क्या सरकारी योजनाओं का पैसा गरीबों के विकास के लिए है या सरपंच-सचिव की जेब भरने के लिए? जिला नरसिंहपुर की जनपद पंचायत करेली अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खमरिया (रीछई) से एक के बाद एक चौंकाने वाले वित्तीय घोटालों और भ्रष्टाचार के दस्तावेज सामने आए हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि, द्वारका पाठक के मकान से ओमप्रकाश के मकान तक सड़क निर्माण के नाम पर ₹3,28,000 फर्जी टी.एस. लगाकर निकाले गए, जबकि मौके पर कोई सड़क ही नहीं बनी है।

इसी तरह द्वारका पाठक के मकान से मनोहर के मकान तक सड़क के नाम पर दिनांक 14.10.2023 को ₹2,50,000 और अन्य जगह ₹1,20,000 की राशि फर्जी बिल वाउचर लगाकर आहरित कर ली गई, जबकि धरातल पर काम नहीं हुआ। एक ही सड़क के लिए बार-बार टी.एस. लगाकर राशि निकाली गई है।

ग्रामीणों ने आपसी चंदा (आर्थिक सहयोग) एकत्र कर शिव जी की पूजा-अर्चना के लिए चबूतरा बनवाया था, लेकिन सरपंच व सचिव ने फर्जी दस्तावेज और बिल लगाकर पंचायत के खाते से ₹1,20,000 और निकाल लिए।

पंचायत में निर्मित आंगनवाड़ी भवन और पंचायत भवन पिछले 3 वर्षों से अधूरे पड़े हैं, लेकिन कागजों में उनका पूरा पैसा निकाला जा चुका है।

पंचायत में बिना किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन के टेंट के नाम पर लगभग ₹5 से 12 लाख के फर्जी बिल लगाए गए हैं।

साफ-सफाई के नाम पर लगभग ₹10 लाख की फर्जी निकासी की गई है।

वहीं पंचायत की सामग्री (फर्नीचर, कंप्यूटर, इन्वर्टर, एल.सी.डी. आदि) पिछले साढ़े तीन वर्षों से उपसरपंच के पुत्र सुनील पटेल के घर पर रखी होने की बात सामने आई है।

वर्ष 2019 में पक्का मकान बनाकर रहने वाले धनराज सेन (पिता पूरनलाल) की फर्जी आई.डी. (M.P. 2971537) बनाकर उनके नाम पर ₹1,25,000 निकाल लिए गए, जबकि उनका वर्तमान में कोई मकान उस योजना में नहीं बनना था।

मनरेगा योजना के तहत फर्जी मस्टररोल भरकर लगभग ₹20 लाख की राशि निकालने और मजदूरों से काम कराने के बजाय मशीनों का उपयोग करने के आरोप हैं। खेत तालाब और गंगा जल संवर्धन योजना के तहत भी फर्जीवाड़े की शिकायत है।

शिकायतों में कुल गबन और वित्तीय अनियमितता की राशि लगभग ₹90 लाख (नब्बे लाख रुपये) तक बताई गई है, जिसमें सरपंच, सचिव और जी.आर.एस. की मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं।

इतने पुख्ता सबूत और बार-बार शिकायतें देने के बावजूद अभी तक दोषियों पर ठोस वैधानिक और आपराधिक कार्रवाई न होना प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

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