नरसिंहपुर में रसोई गैस संकट?
अधिकारी झूठ बोल रहे हैं या जनता? गैस सिलेंडर बना मुसीबत!
नरसिंहपुर जिले में गैस सिलेंडर को लेकर इस समय अफवाहों और अफरा-तफरी का माहौल महसूस हो रहा है! वहीं सोशल मीडिया इस तरह की चर्चाओं पर आग में घी डालता हुआ दिखाई दे रहा है।
एक तरफ अधिकारी वीडियो सार्वजनिक कर बयान दे रहे हैं कि पर्याप्त स्टॉक है, चिंता न करें… और दूसरी तरफ जनता कमेंट बॉक्स में बता रही है कि पिछले चार-पांच दिनों से सिलेंडर की समस्या बनी हुई है!
एक तरफ प्रशासन का दावा – “सब कुछ सामान्य है”… और दूसरी तरफ जनता कह रही है – “चार दिनों से सिलेंडर नहीं मिल रहा!”
खैर अधिकारी प्रशासन के हैं और प्रशासन तो शासन का है… जैसे डोर हिलेगी वैसे ही नाचना पड़ेगा!
लेकिन इस सब के बीच जनता चक्करघिन्नी बनी हुई है! वो समझ नहीं पा रही है कि चूल्हा लें या इंडक्शन! हालांकि सिगड़ी भी एक अन्य विकल्प है, लोकल हीटर की अपेक्षा।
दुकानदारों ने तो आधुनिक सिगड़ी और चूल्हों के ऑर्डर भी दे दिए हैं! आने वाले दिनों में हालात और भयावह हुए तो कुछ तो जलाना पड़ेगा!
ग्रामीण महिलाओं की नाराज़गी
ग्रामीण गृहणियां कहती हैं — “चार दिनों की चांदनी फिर अंधेरी रात!” महिलाओं ने कहा कि ये वही सरकार है जिसे कांग्रेस के समय 400 का सिलेंडर भी महंगा लग रहा था और अब महंगाई तो छोड़िए… उपलब्धता ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
वहीं कई स्थानों से खबर सामने आ रही है कि कुछ होटल-ढाबे वालों ने भी चूल्हे को ही फिलहाल अपना सहारा बना लिया है।
आखिर सच क्या है?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर सच्चाई क्या है? अगर अधिकारियों की मानें तो सब कुछ सामान्य है… और अगर जनता की सुनें तो सिलेंडर मानो सोने के अंडे देने वाली मुर्गी हो गया है — मिल जाए तो किस्मत समझिए!
जिले के कई गैस एजेंसी केंद्रों के बाहर लोगों की पूछताछ का सिलसिला लगातार जारी है। कुछ लोग बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में देरी की शिकायत कर रहे हैं तो कुछ लोग सीधे एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं।
रसोई का संकट सबसे बड़ा संकट होता है… क्योंकि राजनीति और बयान अपनी जगह हैं, लेकिन चूल्हा तो हर घर में रोज जलना ही है।
खैर सच जो भी हो… लेकिन इतना जरूर है कि अगर यही हाल रहा तो शायद आने वाले दिनों में नरसिंहपुर में एलपीजी नहीं बल्कि लकड़ी और सिगड़ी का जमाना फिर लौटता हुआ दिखाई दे सकता है।
नरसिंहपुर
