सरकारी अस्पताल स्कैम : 50 रु जुर्माना… और जिसको रसीद नहीं चाहिए, उसका नाम अलग डायरी में!
जिला अस्पताल में ‘डबल सिस्टम’ से वसूली का आरोप, सवालों के घेरे में प्रबंधन
कभी-कभी सरकारी व्यवस्थाओं में ऐसे दृश्य देखने को मिल जाते हैं कि आदमी सोच में पड़ जाए — यह नियम लागू हो रहा है या कोई नया ‘लोकल सिस्टम’ चल रहा है?मामला जिला सरकारी अस्पताल का बताया जा रहा है। अस्पताल परिसर में गुटखा और बीड़ी पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम अपनी जगह सही है, लेकिन इन दिनों अस्पताल प्रबंधन के कुछ कर्मचारी जुर्माना वसूली को लेकर कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
महिला सर्जिकल वार्ड के बाहर हुआ पूरा घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि महिला सर्जिकल वार्ड के बाहर कुछ परिजन कुर्सियों पर बैठे हुए थे। तभी एक महिला वहां पहुंचती हैं और पूछती हैं —
“यहाँ गुटखा कौन कौन रखा हुआ है?”
कुछ युवक हामी भर देते हैं। इसके बाद महिला कहती हैं —
“आपको 50 रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा, रसीद बनवानी पड़ेगी।”
युवक भी सीधे जवाब देता है —
“ठीक है… बना दीजिए रसीद।”
इसके बाद सामने आया ‘डायरी सिस्टम’
लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू होती है। महिला कहती हैं —
“जिसे रसीद नहीं बनवानी, उसका नाम हम अलग इस डायरी में लिख देते हैं… और जो सरकारी रसीद लेता है उसका नाम इस बंदी रजिस्टर में लिखा जाता है।”
अब जरा ठहर कर सोचिए…
सरकारी जुर्माने की दो-दो व्यवस्था? एक रसीद वाली… और एक डायरी वाली?
यानी अस्पताल में शायद एक नया ‘डुअल सिस्टम’ चल रहा है।
- एक तरफ सरकारी रजिस्टर
- और दूसरी तरफ डायरी का हिसाब-किताब
सबसे बड़ा सवाल
अब सवाल यह उठता है कि —
डायरी वाले पैसों का हिसाब आखिर जाता कहां है?
और उस पैसे का माई-बाप कौन है?
यह तो शायद बाद में तय होता होगा… या फिर तय हो चुका होगा — बस जनता को पता नहीं!
