नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरणों में
घाटों की सफाई से लेकर धार्मिक आयोजनों तक, प्रशासन और समाज जुटा
नर्मदा अंचल में आस्था का सबसे बड़ा पर्व माने जाने वाले नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरणों में पहुंच चुकी हैं। नर्मदा तटवर्ती क्षेत्रों में धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। घाटों की सफाई, सजावट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर दिन-रात काम किया जा रहा है।
घाटों पर बढ़ी चहल-पहल
प्रमुख घाटों पर सुबह से ही सफाईकर्मी, स्वयंसेवी संगठन और नगर पंचायत के कर्मचारी सक्रिय नजर आ रहे हैं। वर्षों से जमा गाद, कचरा और झाड़ियों को हटाया जा रहा है। कई स्थानों पर सीढ़ियों की मरम्मत और रंग-रोगन का कार्य भी कराया गया है। शाम होते ही घाटों पर दीयों और लाइटिंग की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सवमय वातावरण में नजर आ रहा है।
धार्मिक अनुष्ठानों की रूपरेखा तय
संत-समाज और पंडितों द्वारा नर्मदा जन्मोत्सव के दिन होने वाले महाआरती, विशेष पूजन, हवन एवं भजन-कीर्तन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। कई आश्रमों और मंदिरों में पहले से ही अखंड रामधुन और नर्मदा नाम स्मरण चल रहा है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और प्रसाद वितरण की भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
“नर्मदा जन्मोत्सव केवल पर्व नहीं, यह हमारी आस्था और संस्कृति की पहचान है।”
प्रशासन अलर्ट मोड में
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल की तैनाती, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की तैयारी की जा रही है। नगर प्रशासन द्वारा घाटों पर अस्थायी शौचालय, पेयजल एवं प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों में उत्साह
नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर स्थानीय दुकानदारों और नाव चालकों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। पूजा सामग्री, दीपक, अगरबत्ती, फूल और नारियल की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। नाव संचालक भी अपने संसाधनों की मरम्मत और सजावट में जुटे हैं।
कुल मिलाकर, नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां अपने अंतिम पड़ाव पर हैं और पूरा नर्मदा अंचल आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना के रंग में रंगने को तैयार है।
