केसला में विंध्यवासिनी कंपनी का अवैध रेत खनन?
सालीचौका | गाडरवारा
सालीचौका नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत केसला गांव में विंध्यवासिनी कंपनी द्वारा अवैध रेत खनन किए जाने के आरोप अब केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह मामला सोशल मीडिया से होते हुए प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच चुका है।
सोशल मीडिया वीडियो ने खोली पोल?
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में चिचली जनपद अध्यक्ष श्रीमती राधा अहिरवार स्वयं यह कहते हुए नजर आ रही हैं कि विंध्यवासिनी कंपनी द्वारा अवैध रेत खनन किया जा रहा है। वीडियो में यह भी बताया गया है कि इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की जा चुकी है।
“अवैध रेत खनन की शिकायत कलेक्टर से की गई है।”
— श्रीमती राधा अहिरवार, जनपद अध्यक्ष (चिचली)
नदी का सीना छलनी, नियम कागजों में
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत निकालने के लिए पोकलेन मशीनें, डंपर और ट्रैक्टर लगातार लगाए जा रहे हैं। खनन की गहराई तय मानकों से कहीं अधिक है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है और आसपास के खेतों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
जब जनप्रतिनिधि बोल रही हैं, तो प्रशासन क्यों खामोश?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से अवैध खनन की बात कह रही हैं, और शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंच चुकी है, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या शिकायत सिर्फ फाइलों में दफन हो गई?
क्या विंध्यवासिनी कंपनी को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं, कंपनियों के लिए नहीं?
पर्यावरण पर हमला या प्रशासनिक विफलता?
अवैध रेत खनन से नदी, पर्यावरण और भविष्य तीनों खतरे में हैं। भूजल स्तर गिरने, कटाव बढ़ने और आने वाले समय में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या कहा जाए?
अब सवालों से बच पाएगा कौन?
जनप्रतिनिधि की बात, सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोप — सब कुछ सामने होने के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल लाजिमी है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर केसला की नदी यूं ही रेत के नाम पर खोदी जाती रहेगी?
